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संयुक्त राष्ट्र में भारत की कड़ी चेतावनी; होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले ‘अस्वीकार्य’

सुरक्षित नौवहन बहाल करने की मांग

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भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में होर्मुज़ जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर हो रहे हमलों को लेकर गहरी चिंता जताई है और इसे अस्वीकार्य करार दिया है। भारत ने वैश्विक समुदाय से अपील की है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर सुरक्षित और निर्बाध नौवहन को तुरंत बहाल किया जाए।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने ‘मध्य पूर्व की स्थिति’ पर आयोजित बहस के दौरान कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि यह मार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इससे भारत की ऊर्जा तथा आर्थिक सुरक्षा सीधे प्रभावित होती है। उन्होंने कहा, “भारत के लिए विशेष चिंता का विषय होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाला वाणिज्यिक जहाजरानी है। इस संघर्ष में वाणिज्यिक जहाजों को सैन्य हमलों का लक्ष्य बनाया जाना निंदनीय है।”

भारत ने नागरिक समुद्री गतिविधियों पर हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इससे न केवल व्यापार प्रभावित होता है, बल्कि जहाजों पर काम कर रहे कर्मियों की जान भी खतरे में पड़ती है। उन्होंने दोहराया, “वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना और नौवहन एवं व्यापार की स्वतंत्रता में बाधा डालना पूरी तरह अस्वीकार्य है।”

भारत ने अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन पर जोर देते हुए कहा कि वैश्विक व्यापार के इस अहम मार्ग पर मुक्त और सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा, “अंतरराष्ट्रीय कानून का पूर्ण सम्मान होना चाहिए और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में सुरक्षित एवं निर्बाध नौवहन जल्द से जल्द बहाल किया जाना चाहिए।”

इस दौरान भारत ने मानवीय पहलू को भी रेखांकित किया। प्रतिनिधि ने बताया कि इस संघर्ष के दौरान भारतीय नाविकों की भी जान गई है, जो बेहद दुखद और चिंताजनक है। भारत ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए सभी देशों से संयम बरतने, स्थिति को और न बिगाड़ने और कूटनीति के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की। उन्होंने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

भारत ने एक बार फिर सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान की आवश्यकता पर बल दिया। गौरतलब है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है। ऐसे में यहां बढ़ता तनाव न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी गंभीर चुनौती बन सकता है।

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