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Sunday, October 18, 2026
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‘लाडली बहना’ योजना बंद कर देनी चाहिए? सुप्रीम कोर्ट ने शिंदे सरकार को लगाई​ फटकार !

सुप्रीम कोर्ट द्वारा मुआवजा भुगतान के आदेश के बाद महाराष्ट्र सरकार ने हलफनामा दायर किया​|​ इसमें कहा गया कि हम उन्हें पुणे नगर निगम परिसर में एक और जगह देने के लिए तैयार हैं। इस पर जस्टिस भूषण गवई नाराज हो गये​|​

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पुणे में एक जमीन मामले पर राज्य सरकार की सुप्रीम कोर्ट आक्रामक हो गई​|​ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गये आदेश का पालन नहीं किया​|​ इसके चलते राज्य में लोकप्रिय हुई इस योजना पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की​|​ जमीन के बदले पैसा दे रहे हैं या जमीन, यह स्पष्ट करें, नहीं तो क्या हम ‘लाडली बहना’ योजना बंद कर दें? ऐसे शब्दों में सुप्रीम कोर्ट ने शिंदे सरकार के फटकार​ लगाई​ है|​

​​क्या​ ​’लाडली बहना​’ योजना बंद कर देनी चाहिए?: सुप्रीम कोर्ट ने पुणे के पाषाण में जमीन के मुआवजे के मामले पर सुनवाई की​|​ कोर्ट के आदेश के बावजूद जमीन का मुआवजा नहीं दिया गया​|​ सुप्रीम कोर्ट द्वारा मुआवजा भुगतान के आदेश के बाद महाराष्ट्र सरकार ने हलफनामा दायर किया​|​ इसमें कहा गया कि हम उन्हें पुणे नगर निगम परिसर में एक और जगह देने के लिए तैयार हैं। इस पर जस्टिस भूषण गवई नाराज हो गये​|​

​​उन्होंने सरकारी वकीलों से कहा, क्या आप सिर्फ सरकारी डाकिया हैं? यह स्पष्ट करें कि जमीन के बदले पैसा दे रहे हैं या जमीन, नहीं तो हमें ‘लाडली बहना​’ योजना बंद कर देनी चाहिए? कोर्ट ने कहा​|​ इसके बाद राज्य सरकार के अपर मुख्य सचिव राजेश कुमार को अगली सुनवाई में शामिल होने का आदेश दिया गया​|​

​​अन्यथा कोर्ट की अवमानना का मामला: मौजूदा स्थिति यह है कि राज्य सरकार इस मामले में गंभीर नहीं है​|​ सरकार सिर्फ सुनवाई टालने की कोशिश कर रही है और समय बर्बाद कर रही है​|​ अगली सुनवाई में हम कुछ नहीं सुनेंगे​|​ हम जनहित का फैसला लेंगे​|​ राज्य सरकार को इस मामले पर तुरंत ध्यान देकर इसे प्राथमिकता देनी चाहिए​|​ अगर इस मामले को सही तरीके से नहीं संभाला गया तो हम कोर्ट की अवमानना का केस दायर करेंगे, कोर्ट ने राज्य सरकार के वकील निशांत कांतेश्वरकर की सुनवाई शुरू की​|​

​क्या है मामला?: सुप्रीम कोर्ट में लंबित इस मामले में वादी ने दावा किया कि उसके पूर्वजों ने 1950 में पुणे में 24 एकड़ जमीन खरीदी थी| 1963 में, वादी ने राज्य सरकार द्वारा उस ज़मीन पर कब्ज़ा करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। वादी के पक्ष में फैसला आने के बाद भी आदेश लागू नहीं किया गया।

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