कैरोल ने एक बयान में कहा, “मैं उन हजारों कामकाजी लोगों के लिए लड़ रहा हूं जो डेंटिस्ट के पास जाने का खर्च नहीं उठा सकते।” उन्होंने अपने कैंपेन के शुरुआत इसी वायदे के साथ की है और शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसकी झलक भी दिखाई।
इस योजना पर लेबर सरकार 230 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर खर्च करेगी और तीन साल में राज्यभर में 10 सार्वजनिक दंत चिकित्सा क्लीनिक खोलेगी। इनमें से सात क्लीनिक मेलबर्न और तीन रीजनल विक्टोरिया में स्थापित किए जाएंगे। इन क्लीनिकों में लोगों को बिना पूर्व अपॉइंटमेंट के चेकअप, फिलिंग, रूट कैनाल और दांत निकालने जैसी सेवाएं मुफ्त मिलेंगी।
स्वास्थ्य मंत्री इंग्रिड स्टिट ने एबीसी न्यूज को बताया कि कुछ क्लीनिक जुलाई 2027 से काम करना शुरू कर सकते हैं। क्लीनिक सप्ताह के दिनों में सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक और सप्ताहांत में सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक खुले रहेंगे।
कैरोल ने इसे महंगाई और जीवन-यापन की बढ़ती लागत से निपटने के लिए ‘संरचनात्मक सहायता’ बताया है। उनका कहना है कि लोगों को दंत चिकित्सा इसलिए नहीं टालनी चाहिए क्योंकि उनके पास इलाज का खर्च उठाने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है।
ऑस्ट्रेलिया में अधिकांश वयस्कों की दंत चिकित्सा सेवाएं मेडिकेयर के दायरे में नहीं आतीं। मुफ्त या कम लागत वाली सेवाएं मुख्य रूप से बच्चों, युवाओं, आदिवासी और टोरेस स्ट्रेट आइलैंडर समुदायों तथा कुछ रियायती कार्डधारकों के लिए उपलब्ध हैं।
हालांकि विपक्ष ने इस घोषणा पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि विक्टोरिया में मौजूदा सार्वजनिक दंत चिकित्सा सेवाओं के लिए प्रतीक्षा अवधि पहले ही काफी लंबी है और सरकार के लिए पर्याप्त संख्या में कर्मचारियों की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती होगी। विपक्ष के अनुसार, सार्वजनिक दंत चिकित्सा के लिए राज्य में औसत प्रतीक्षा अवधि करीब सात महीने है।
ग्रीन्स ने भी योजना का स्वागत करने के बजाय इसके सीमित पैमाने पर सवाल उठाया है। पार्टी का कहना है कि केवल 10 क्लीनिक राज्य की जरूरत के मुकाबले काफी कम हैं। दूसरी ओर, विक्टोरियन काउंसिल ऑफ सोशल सर्विस ने योजना का स्वागत करते हुए कहा है कि इन सेवाओं तक कम आय वाले लोगों की प्राथमिक पहुंच सुनिश्चित की जानी चाहिए।
यह घोषणा 28 नवंबर के विक्टोरिया विधानसभा चुनाव से करीब 100 दिन पहले लेबर का पहला बड़ा चुनावी वादा है। कैरोल जुलाई में जैसिंटा एलन के बाद प्रीमियर बने थे और अब पार्टी को लगातार चुनावी दबाव के बीच सत्ता में बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।



