फर्जी AI वीडिओ के जरिए सीएम फडणवीस को बदनाम करने वाला जालना से गिरफ्तार

मुंबई साइबर सेल की बड़ी कार्रवाई

फर्जी AI वीडिओ के जरिए सीएम फडणवीस को बदनाम करने वाला जालना से गिरफ्तार

Man defaming CM Fadnavis through fake AI video arrested from Jalna

महाराष्ट्र में एआई आधारित फर्जी और भ्रामक कंटेंट पर कड़ी कार्रवाई करते हुए मुंबई पुलिस की साइबर सेल ने जालना के एक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने कथित तौर पर एक एआई-जनरेटेड वीडियो बनाकर पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार से जुड़े विमान हादसे में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को बदनाम करने की कोशिश की और एआई वीडिओ में भ्रामक जानकारी फैलाई।

 

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार युवक की पहचान उद्धव भगवान कापसे के रूप में हुई है, जो जालना जिले के बुट्टेगांव गांव का निवासी है। उसे हिरासत में लेकर मुंबई लाया गया, जहां बांद्रा की एक स्थानीय अदालत ने उसे 10 अप्रैल तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया है। जांच में सामने आया कि आरोपी द्वारा अपलोड किया गया वीडियो सोशल मीडिया पर करीब 1.5 लाख व्यूज हासिल कर चुका था, जिसे बाद में डिलीट कर दिया गया।

 

पुलिस के अनुसार, कापसे ने विभिन्न न्यूज चैनलों के वीडियो क्लिप्स को जोड़कर एआई टूल्स की मदद से एक भ्रामक वीडियो तैयार किया। इस वीडियो में विवादित बयान शामिल थे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सीधे तौर पर निशाना बनाया गया था।

 

मामले के अनुसार, जनवरी में अजित पवार मुंबई से बारामती एक निजी विमान से जा रहे थे, तभी लैंडिंग के दौरान विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें उनकी और छह अन्य लोगों की मौत होने की बात सामने आई थी। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह के वीडियो और दावे वायरल हुए थे, जिनमें से एक यह एआई-जनरेटेड वीडियो भी था।

 

वायरल कंटेंट को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर साइबर सेल ने मामला दर्ज किया। तकनीकी जांच के जरिए वीडियो के स्रोत का पता जालना तक लगाया गया, जिसके बाद पुलिस टीम ने सोमवार देर रात आरोपी को हिरासत में लिया।

पूछताछ के दौरान आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने उपलब्ध फुटेज को एडिट कर एआई टूल्स की मदद से वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर साझा किया।

पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि आरोपी ने यह काम अकेले किया या उसके पीछे किसी अन्य व्यक्ति या संगठन का हाथ है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि वीडियो बनाने और फैलाने में किसी तरह की वित्तीय या बाहरी मदद तो नहीं मिली।

इस कार्रवाई को एआई के दुरुपयोग के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जहां कानून प्रवर्तन एजेंसियां डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फैल रहे फर्जी और भ्रामक कंटेंट को लेकर सतर्क हो गई हैं।

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