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Tuesday, March 3, 2026
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Man Ki Baat: प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मन की बात’ में भारतीय नववर्ष और त्योहारों की एकता पर दिया जोर!

पीएम मोदी ने इस अवसर पर उन चिट्ठियों और संदेशों का भी जिक्र किया, जो उन्हें देशभर के नागरिकों से प्राप्त हुए थे। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों से भेजे गए संदेश इस बात को दर्शाते हैं कि हमारी संस्कृति कितनी जीवंत और आपसी सद्भाव से भरी हुई है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 120वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने चैत्र नवरात्र, उगादि, विषु, गुड़ी पड़वा, रोंगाली बिहू, पोइला बोइशाख और नवरेह जैसे विभिन्न भारतीय नववर्ष और त्योहारों की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि ये पर्व भारत की विविधता में एकता का प्रतीक हैं और हमारी सांस्कृतिक समृद्धि व एकजुटता को दर्शाते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने विभिन्न भाषाओं में शुभकामनाएं देकर देश की सांस्कृतिक विविधता को सम्मान दिया। उन्होंने कन्नड़ और तेलुगु में उगादि, कोंकणी में संसार पाड़वा, मराठी में गुड़ी पड़वा, मलयालम में विषु और तमिल में पुथांडु की बधाई दी। उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों में मनाए जाने वाले ये त्योहार भारत की अनूठी परंपराओं को दर्शाते हैं, जहां भले ही नाम और रीति-रिवाज अलग हों, लेकिन उनकी भावना एक है—समाज में खुशी और सकारात्मकता फैलाना।

पीएम मोदी ने इस अवसर पर उन चिट्ठियों और संदेशों का भी जिक्र किया, जो उन्हें देशभर के नागरिकों से प्राप्त हुए थे। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों से भेजे गए संदेश इस बात को दर्शाते हैं कि हमारी संस्कृति कितनी जीवंत और आपसी सद्भाव से भरी हुई है।

इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने आगामी दिनों में आने वाले विभिन्न त्योहारों का भी जिक्र किया और कहा कि 13 से 15 अप्रैल के बीच असम में रोंगाली बिहू, बंगाल में पोइला बोइशाख और कश्मीर में नवरेह का आयोजन होगा। उन्होंने ईद का भी उल्लेख करते हुए सभी देशवासियों को आने वाले पर्वों की शुभकामनाएं दीं।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, “हमारे ये त्योहार भले ही अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नामों से जाने जाते हों, लेकिन वे दिखाते हैं कि भारत की विविधता में भी एकता कैसे पिरोई हुई है। यह भावना हमें निरंतर मजबूत करनी है और अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखते हुए एकजुट रहना है।”

प्रधानमंत्री का यह संदेश भारतीय संस्कृति के महत्व को उजागर करता है और देशवासियों को यह याद दिलाता है कि चाहे भाषा या परंपराएं भले ही अलग हों, लेकिन त्योहारों की भावना हमें एकजुट करती है।

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