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Friday, March 27, 2026
होमन्यूज़ अपडेटमंगल पांडे की जयंती प्रधानमंत्री मोदी समेत कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि!

मंगल पांडे की जयंती प्रधानमंत्री मोदी समेत कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि!

कहा – ‘उनका साहस युगों तक रहेगा प्रेरणास्त्रोत’

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1857 की क्रांति के अग्रदूत और भारत के स्वतंत्रता संग्राम के प्रथम क्रांतिकारी वीर मंगल पांडे की जयंती पर आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत देशभर के कई प्रमुख नेताओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। सोशल मीडिया पर किए गए संदेशों में नेताओं ने मंगल पांडे के अदम्य साहस, मातृभूमि के प्रति समर्पण और ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ उनके संघर्ष को याद करते हुए उन्हें ‘स्वतंत्रता का प्रथम स्वर’ बताया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “महान स्वतंत्रता सेनानी मंगल पांडे को उनकी जयंती पर आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। वे ब्रिटिश हुकूमत को चुनौती देने वाले देश के अग्रणी योद्धा थे। उनके साहस और पराक्रम की कहानी देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।”

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मंगल पांडे को याद करते हुए कहा, “1857 के संग्राम के नायक, अद्वितीय योद्धा व राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा मंगल पांडे जी को उनकी जयंती पर कोटि-कोटि नमन।” उन्होंने आगे लिखा, “अपने पराक्रम की चिंगारी से विशाल ज्वाला बनाकर उन्होंने अंग्रेजी शासन की नींव हिला दी। उनकी वीरता आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा है।”

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने लिखा, “1857 की क्रांति के अग्रदूत, मां भारती के वीर सपूत और अमर शहीद मंगल पांडे का त्याग और समर्पण अविस्मरणीय है। राष्ट्र उनके बलिदान के लिए सदैव कृतज्ञ रहेगा।”

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा, “मातृभूमि के प्रति आपका बलिदान भावी पीढ़ियों को सदैव राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देता रहेगा। वीर सपूत को बारंबार प्रणाम।”

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिखा, “मां भारती की स्वाधीनता, धर्म की रक्षा और धरा की गरिमा के लिए मंगल पांडे का सर्वोच्च बलिदान स्वतंत्रता की चेतना का प्रथम शंखनाद था।”

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने उन्हें याद करते हुए लिखा, “न डर था, न झुकने की सोच, बस आज़ादी का जुनून था। एक नाम जो बगावत की पहचान बना – महानायक मंगल पांडे।”

मंगल पांडे को 1857 के स्वाधीनता संग्राम की चिंगारी माना जाता है। बैरकपुर छावनी में उनके विद्रोह ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ देश में पहली बार सशस्त्र क्रांति की नींव रखी। आज उनकी जयंती पर देशभर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उनका साहस, उनकी बगावत और बलिदान आज भी भारत की चेतना और राष्ट्रधर्म का प्रतीक बना हुआ है।

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