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कांग्रेस शासन में सुलगता रहा मणिपुर पर कांग्रेस ने नहीं ली सुध : निर्मला सीतारमण​!

निर्मला सीतारमण ने कहा कि वर्ष 2002 से लेकर 2017 तक मणिपुर में कांग्रेस की सरकार थी। केंद्र में भी 2014 से पहले तक कांग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार थी।

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राज्य सभा में मणिपुर पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिस समय केंद्र और मणिपुर दोनों स्थानों पर कांग्रेस की सरकार थी तब मणिपुर में सैकड़ों लोग हिंसा में मारे गए थे। हालांकि तब केंद्र सरकार का कोई मंत्री मणिपुर की सुध लेने वहां नहीं गया।

निर्मला सीतारमण ने कहा कि वर्ष 2002 से लेकर 2017 तक मणिपुर में कांग्रेस की सरकार थी। केंद्र में भी 2014 से पहले तक कांग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार थी। तब वहां मणिपुर में 628 बंद हुए थे। हिंसा के कारण लोगों की मृत्यु हुई थी। 628 बंद और नाकेबंदी हुई, जिससे राज्य के खजाने को 2828 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2011 में सबसे बड़ा आर्थिक बंद हुआ था जो 120 दिन तक चला। इस दौरान कांग्रेस के शासनकाल में मणिपुर में आवश्यक वस्तुओं की भयंकर कमी हो गई थी। पेट्रोल की कीमत बढ़कर दो सौ रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई थी। इतना ही नहीं गैस सिलेंडर की कीमत 2 हजार रुपये प्रति सिलेंडर तक पहुंच गई थी।

उन्होंने कहा मौजूदा स्थिति में जब वहां तनाव शुरू हुआ तो केंद्रीय गृहमंत्री ने लगातार राज्य का दौरा किया। वे मणिपुर में एक कैंप से दूसरे कैंप जाते रहे। गृह मंत्री वहां अलग-अलग समुदाय के लोगों से मिले। भारत के गृह मंत्री ने चार दिन मणिपुर में बिताए। गृह मंत्री उस समय वहां पर गए जब वहां सबसे अधिक तनाव था।

वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री ने बिना किसी भेदभाव सभी पीड़ित लोगों से मुलाकात की। लेकिन कांग्रेस के शासनकाल में जब भी हिंसा हुई तो केंद्र की तरफ से मणिपुर की सुध लेने कोई मंत्री नहीं गया। जब केंद्र और मणिपुर दोनों स्थानों पर कांग्रेस की सरकार थी तब वहां हुई हिंसा के दौरान केंद्र का कोई मंत्री मणिपुर नहीं गया। उन्होंने कहा कि हमारी डबल इंजन सरकार है जिसके केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय 23 दिन तक मणिपुर में रहे।

मंगलवार को निर्मला सीतारमण राज्यसभा में जिस दौरान अपनी बात रख रही थीं, उस दौरान विपक्षी सदस्यों ने उनके वक्तव्यों पर एतराज जताया। तृणमूल कांग्रेस की सांसद सुष्मिता देव समेत अन्य कई सांसदों ने टोकाटाकी की। इस दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री और तृणमूल कांग्रेस के सांसदों के बीच नोकझोंक भी हुई।

वित्त मंत्री ने कहा कि इन्हें अपनी मुख्यमंत्री (ममता बनर्जी) को दिखाना है कि इन्होंने विरोध किया है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यह सदन है, पश्चिम बंगाल या फिर कोलकाता की कोई गली नहीं है जहां हो-हल्ला किया जाए, पत्थरबाजी की जाए और फिर भाग जाएं।

वित्त मंत्री के वक्तव्य के बीच में सीपीएम के एक सांसद ने कहा कि प्रश्न यह है कि मणिपुर में कभी ऐसी सांप्रदायिक हिंसा नहीं हुई है। इस पर वित्त मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि सीपीएम के राज में पश्चिम बंगाल में इतिहास के अब तक के सबसे भयावह दंगे हुए थे। त्रिपुरा में भी सीपीएम के राज में हिंसा हुई। इसके साथ ही उन्होंने सीपीएम के शासन वाले केरल में अव्यवस्था की बात भी कही।

मणिपुर में कांग्रेस शासन काल का उल्लेख करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि वर्ष 1993 में राजकुमार दोरेंद्र सिंह कांग्रेस के मुख्यमंत्री थे। उनके कार्यकाल में मणिपुर में कुकी और नागा के बीच भयंकर तनाव हुआ। इस तनाव के कारण मणिपुर सुलग उठा और वहां अप्रैल व दिसंबर 1993 के दौरान हुई घटनाओं में 750 लोगों की मौत हो गई।

हिंसा के दौरान मणिपुर के 350 गांवों को जला दिया गया लेकिन इस दौरान कांग्रेस की सरकार में प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव और तत्कालीन गृह मंत्री शंकर राव चव्हाण मणिपुर नहीं गए। आज यही लोग मणिपुर को लेकर बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 1997-98 में इंद्र कुमार गुजराल देश के प्रधानमंत्री थे, उनके कार्यकाल में भी मणिपुर में हिंसा हुई। तब वहां 350 लोगों की मौत हुई है लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री मणिपुर नहीं गए।

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