“भारत का रहने वाला हूं भारत की बात सुनाता हूं!”

ऑपरेशन सिंदूर पर बोलने से Congress द्वारा बाहर किए जाने के बाद मनीष तिवारी का व्यंग्यपूर्ण पोस्ट

“भारत का रहने वाला हूं भारत की बात सुनाता हूं!”

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कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने ऑपरेशन सिंदूर पर संसद में चर्चा से खुद को बाहर किए जाने के बाद पार्टी पर एक परोक्ष तंज कसा है। उन्होंने देशभक्ति गीत के बोल साझा करते हुए अपने मन की बात जाहिर की,“भारत का रहने वाला हूं, भारत की बात सुनाता हूं।”

सोमवार (28 जुलाई) को संसद में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर जब बहस शुरू हुई, तो चर्चा के लिए कांग्रेस की ओर से मनीष तिवारी और शशि थरूर जैसे वरिष्ठ, अनुभवी और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सरकार के साथ खड़े रहे नेताओं को बाहरी कर दिया गया। यह वही नेता हैं जो ऑपरेशन सिंदूर के बाद सरकार की ऑल पार्टी डेलिगेशन का हिस्सा बने और कई देशों में जाकर पाकिस्तान को आतंकवाद के समर्थन के मुद्दे पर घेरा।

मनीष तिवारी ने इस घटनाक्रम पर एक न्यूज रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट शेयर किया, जिसमें लिखा था कि उन्हें और थरूर को बोलने नहीं दिया गया। इसके साथ ही उन्होंने 1970 की फिल्म पूरब और पश्चिम के प्रसिद्ध गीत की पंक्तियां पोस्ट कीं,
“है प्रीत जहां की रीत सदा, मैं गीत वहां के गाता हूं,
भारत का रहने वाला हूं, भारत की बात सुनाता हूं।”
और अंत में लिखा — “जय हिंद”।

रिपोर्ट के अनुसार, मनीष तिवारी ने खुद पार्टी नेतृत्व को पत्र लिखकर बहस में भाग लेने की इच्छा जताई थी, लेकिन कांग्रेस ने उन्हें नजरअंदाज कर दिया। कांग्रेस की पार्टी की और से भारत के आल पार्टी डेलिगेशन का हिस्सा रहे अमर सिंह को भी बोलने का मौका नहीं दिया।

शशि थरूर को कांग्रेस ने पहले बहस में बोलने का निमंत्रण दिया था, लेकिन उन्होंने उसे ठुकरा दिया। सूत्रों के अनुसार, थरूर ने कहा कि वह सरकार की आलोचना नहीं कर सकते क्योंकि उन्होंने विदेशों में जाकर ऑपरेशन सिंदूर की सफलता की वकालत की थी और अब उस लाइन से हटना उनके लिए संभव नहीं है। पत्रकारों से बात करते हुए थरूर ने व्यंग्य में कहा कि वह इन दिनों “मौन व्रत” पर हैं। उनकी यह टिप्पणी कांग्रेस के भीतर मचे आंतरिक घमासान को और उजागर करती है।

इन घटनाओं ने कांग्रेस के भीतर विचारधारा और रणनीति को लेकर मतभेद का खुलासा किया है। कांग्रेस ने खासकर उन नेताओं को बाहर किया है, जिन्होंने विदेशों में भारत का पक्ष मजबूती से रखा, इस बात से सवाल उठाता है कि पार्टी की आंतरिक नीति कितनी कमज़ोर है।

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