प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे को लेकर वहां जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। बुधवार (25 फरवरी) से शुरू हुए दो दिवसीय प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री मोदी इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के निमंत्रण पर वहां पहुंचे हैं। उनके स्वागत में इजरायल की संसद ‘नेसेट’ को भारतीय तिरंगे की रोशनी से सजाया गया, जिसकी तस्वीर संसद के स्पीकर अमीर ओहाना ने सोशल मीडिया पर साझा की। वहीं अखबरों में प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत हिंदी और हिब्रू में ‘नमस्ते’ लिखकर किया गया है।
In tribute to Prime Minister @narendramodi, the Knesset is illuminated tonight in the colors of the Indian flag 🇮🇳 pic.twitter.com/YxWswwOX69
— Amir Ohana – אמיר אוחנה (@AmirOhana) February 24, 2026
इजरायल के प्रमुख समाचार पत्रों में भी इस दौरे को व्यापक कवरेज मिली है। ‘द यरूशलम पोस्ट’ ने अपने फ्रंट पेज पर शीर्षक दिया, “दो प्राचीन राष्ट्रों ने एक नया अध्याय शुरू किया”। अखबार ने हिंदी और हिब्रू में ‘नमस्ते’ लिखकर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया और इस यात्रा को ऐतिहासिक तथा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताया। रिपोर्ट में कहा गया कि इजरायल लंबे समय से भारत को एक अहम मित्र के रूप में देखता रहा है और यह दौरा भारत को शीर्ष रणनीतिक प्राथमिकता देने का अवसर है।
अखबार में प्रकाशित विश्लेषण में उल्लेख किया गया कि दोनों देशों के रिश्तों में भरोसा और राजनीतिक समझ रही है, लेकिन संभावनाओं के अनुरूप क्रियान्वयन की गति अपेक्षाकृत धीमी रही। ‘द मोदी डॉक्ट्रिन’ शीर्षक लेख में लेखक अमिचाई स्टर्न ने वर्ष 2017 की यात्रा को याद किया, जब प्रधानमंत्री मोदी बेन-गुरियन एयरपोर्ट पर उतरने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने थे। उस यात्रा को दशकों की कूटनीतिक झिझक के अंत के रूप में देखा गया था।
रणनीतिक साझेदारी का नया चरण:
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, इस यात्रा में दोनों नेता रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा करेंगे। रक्षा और सुरक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, नवाचार, कृषि, जल प्रबंधन, व्यापार, अर्थव्यवस्था और जन-से-जन संपर्क जैसे क्षेत्रों में आगे की रूपरेखा पर चर्चा होगी। इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग से भी प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात निर्धारित है।
विश्लेषणात्मक लेख में हर्ब केइनोन ने लिखा कि यह दौरा केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक माहौल में हो रहा है। 2017 में नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करते हुए कहा था कि इजरायल लंबे समय से इस क्षण की प्रतीक्षा कर रहा था। उल्लेखनीय है कि 1947 में भारत ने संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के गठन के खिलाफ मतदान किया था, जबकि पूर्ण राजनयिक संबंध 1992 में स्थापित हुए।
एक अन्य रिपोर्ट में पत्रकार ज्विका क्लीन ने भारत में इजरायल के राजदूत जेपी सिंह के हवाले से लिखा कि यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों में “नए चरण” की शुरुआत करेगी। लगभग नौ वर्षों बाद हो रहा यह दौरा प्रतीकात्मक और व्यावहारिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जैसे ही प्रधानमंत्री मोदी इजरायली भूमि पर पहुंचे, दोनों देशों के बीच सहयोग को नई दिशा देने की उम्मीदें और प्रबल हो गई हैं। यह यात्रा न केवल द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूती देगी, बल्कि वैश्विक मंच पर भी एक स्पष्ट रणनीतिक संदेश के रूप में देखी जा रही है।
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