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Friday, November 6, 2026
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मानसून सत्र: संसद में खड़गे और नड्डा की जुबानी जंग!

केंद्रीय मंत्री जे. पी. नड्डा ने जोर देकर कहा-“आजादी के बाद ऐसा ऑपरेशन नहीं हुआ” यही भारत की ताकत है, आतंकवाद को हमने निर्णायक रूप से टारगेट किया।

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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा में सवाल उठाया कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुआ आतंकवादी हमला – जिसमें 26 पर्यटक मारे गए – के अभियुक्तों को आज तक गिरफ्तार या बेअसर क्यों नहीं किया गया। उनके अनुसार जम्मू‑कश्मीर के उपराज्यपाल ने इसे “इंटेलिजेंस फेल्योर” करार दिया था। उन्होंने “ऑपरेशन सिंदूर” पर भी विस्तार से चर्चा की मांग की, जिसे सरकार ने अंजाम दिया था लेकिन उसके परिणामों के बारे में पारदर्शिता नहीं दिखाई गई।

खड़गे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी को हमले की पूर्व सूचना थी – उन्होंने तीन दिन पहले कन्याकुमारी यात्रा रद्द की थी – मगर कोई सुरक्षा अलर्ट या टूरिस्ट एडवाइजरी जारी नहीं की गई।

केंद्रीय मंत्री जे. पी. नड्डा ने कहा कि सरकार “ऑपरेशन सिंदूर” पर पूरा विवरण सार्वजनिक रूप से रखेगी और राज्यसभा में चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने जोर देकर कहा-“आजादी के बाद ऐसा ऑपरेशन नहीं हुआ” यही भारत की ताकत है, आतंकवाद को हमने निर्णायक रूप से टारगेट किया।

7 मई को भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान व पीओके में आतंकवादी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की। इसे ऑपरेशन सिंदूर कहा गया, जो पहलगाम हमले के जवाब में था, जिसमें आतंकवादी ठिकानों को नष्ट कर दिया गया।

विदेश सचिव विक्रम मिश्री ने बताया कि यह ऑपरेशन संवेदनशील लेकिन सटीक था, आतंकवाद को पूर्ण आत्मरक्षा की पहलकदमी के तहत जवाब देने हेतु किया गया।

खड़गे की मांग थी कि सरकार सदन में खुलकर बताए कि आतंकियों को पकड़ा क्यों नहीं गया, ऑपरेशन के वास्तविक नतीजे क्या हैं। नड्डा ने आड़े हाथों खड़े होकर कहा – देश को संदेश देना था, और यह कार्रवाई पिछले 75 वर्षों में सबसे निर्णायक मानी जाएगी।

इस बीच विपक्ष अगले तीन मुद्दों पर जोर दे रहा है: आतंकियों की गिरफ्तारी , ऑपरेशन के आंकड़ों की पारदर्शिता और प्रधानमंत्री द्वारा सचेत करने की कूटनीतिक जिम्मेदारी।

पहलगाम हमले का हिंसक मंजर – 22 अप्रैल को 5 आतंकवादियों द्वारा बीसरन घाटी में 26 लोगों की हत्या – 2008 के मुंबई हमलों के बाद सबसे जघन्य नागरिक जहरीला हमला माना गया।

इसके बाद भारतीय वायुसेना का ऑपरेशन सिंदूर, और अमेरिका‑BRICS‑QUAD सहित अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिशन का समर्थन मिला – इसने विश्व स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ भारत की निर्णय क्षमता को आगे रखा|

संसद के मानसून सत्र में यह बहस हाई‑वोल्टेज थी – विपक्ष ने देश की सुरक्षा, जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग उठाई, तो सरकार ने ऑपरेशन की प्रभावशीलता और कूटनीतिक संकल्प पर भरोसा जताया।

अब केंद्रीय नेतृत्व को इन सवालों के जवाब सदन में स्पष्ट रूप से देने हैं: आतंकियों की गिरफ्तारी, ऑपरेशन के आंकड़े और आने वाले कदम कहाँ तक हैं।

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