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केरल मीनाचिल तालुका में 400 से अधिक ईसाई लड़कियां ‘लव जिहाद’ की शिकार, भाजपा नेता पी.सी. जॉर्ज का बयान!

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केरल के कोट्टायम जिले के पाला में शनिवार (8 मार्च) को आयोजित एक सम्मेलन में बीजेपी नेता पी.सी. जॉर्ज ने विवादास्पद बयान दिया। उन्होंने ईसाई समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि अपनी बेटियों की शादी 24 वर्ष से पहले कर देनी चाहिए ताकि वे “लव जिहाद” का शिकार न बनें। उन्होंने दावा किया कि सिर्फ मीनाचिल तालुका में 400 से अधिक ईसाई लड़कियां इस खतरे का शिकार हो चुकी हैं।

दरअसल यह सम्मेलन बिशप जोसेफ कल्लारंगट और केरल कैथोलिक बिशप्स काउंसिल (KCBC) द्वारा आयोजित किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य नशा मुक्ति पर जागरूकता फैलाना था। हालांकि, केरल के ईसाई समुदाय में “लव जिहाद” को लेकर चिंता लंबे समय से बनी हुई है और इस विषय पर चर्चा इस सम्मेलन में भी छाई रही।

पी.सी. जॉर्ज ने क्यों दिया यह बयान?

पी.सी. जॉर्ज ने अपने संबोधन में कहा कि मीनाचिल क्षेत्र की 400 लापता लड़कियों में से केवल 41 को बचाया जा सका है। उन्होंने हाल ही में 8 मार्च की एक घटना का हवाला दिया, जिसमें 25 वर्षीय महिला रात 9:30 बजे घर से निकली और लापता हो गई। उनका मानना है कि अगर लड़कियों की शादी 22-23 वर्ष की उम्र में कर दी जाए तो वे ऐसे खतरों से बच सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई महिला 28-29 वर्ष की उम्र तक अविवाहित रहती है और नौकरी हासिल कर लेती है, तो वह विवाह से कतराने लगती है, जिससे परिवार उसकी आय पर निर्भर हो जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि “लव जिहाद” से बचने का सबसे सरल उपाय जल्दी विवाह कर देना है।

ईसाई समुदाय में चिंता और चर्च का रुख

बता दें की भाजपा नेता पी.सी. जॉर्ज का यह बयान कोई नया दावा नहीं है। केरल के ईसाई समुदाय ने पहले भी इस विषय पर चिंता जताई है। कई ईसाई संगठनों का आरोप है कि युवतियों को प्रेम संबंधों में फंसाकर धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया जाता है। चर्च भी इस खतरे को लेकर समय-समय पर आगाह करता रहा है।

2020 में, साइरो-मालाबार चर्च ने एक रिपोर्ट जारी कर दावा किया था कि ईसाई लड़कियों को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। चर्च ने वामपंथी सरकार पर इस मुद्दे को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया था। चर्च के प्रवक्ता फादर वर्गीज वल्लीकट्ट ने एक वीडियो में कहा था कि “लव जिहाद” एक सच्चाई है और लड़कियों को सीरिया और अफगानिस्तान जैसे देशों में भेजकर यौन शोषण किया जा रहा है। इसके जवाब में चर्च ने समुदाय को जागरूक करने के लिए अभियान भी शुरू किए थे।

 2005 से 2012 के बीच करीब 4,000 ईसाई लड़कियां लव-जिहाद का शिकार:

“लव जिहाद” का मुद्दा 2019 में भी चर्चा में आया था, जब राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष जॉर्ज कुरियन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर इस पर संज्ञान लेने की मांग की थी। उन्होंने दावा किया था कि 2005 से 2012 के बीच करीब 4,000 ईसाई लड़कियों को धोखे से इस्लाम में धर्मांतरित किया गया। उन्होंने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से इस मामले की जांच की मांग भी की थी।

पत्र में कुछ मामलों का हवाला दिया गया था, जिसमें एक ईसाई लड़की के साथ दुष्कर्म, ब्लैकमेलिंग और जबरन धर्म परिवर्तन का आरोप था। हालांकि, इस मामले में कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन ईसाई समुदाय में चिंता लगातार बनी रही।

2020 में केरल कॅथोलिक बिशप काउंसिल (KCBC) ने केरल सरकार से लापता लड़कियों की जांच की मांग की थी, लेकिन वामपंथी सरकार ने इस विषय को गंभीरता से नहीं लिया। हालांकि, चर्च और बीजेपी इस मुद्दे को एक बड़े सामाजिक खतरे के रूप में देख रहे हैं। बता दें की, केरल में “लव जिहाद” पर बहस कोई नई नहीं है। चाहे वह पी.सी. जॉर्ज का हालिया बयान हो या चर्च द्वारा इस मुद्दे पर लगातार आवाजें उठती रही है। ईसाई समुदाय इसे अपनी बेटियों की सुरक्षा से जोड़कर देख रहा है, जबकि केरल राज्य की वामपंथी सरकार इसे एक निराधार विषय मानती है।

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