पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में जारी हिंसा के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद जगदंबिका पाल ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में राज्य सरकार मूकदर्शक बनी हुई है।
जगदंबिका पाल ने कहा,“आज मुर्शिदाबाद में जो हालात हैं, वे 1947 जैसे हैं। हिंदू परिवार नदी पार कर नाव से पलायन कर रहे हैं और राज्य सरकार, पुलिस कुछ नहीं कर रही। एक पिता और पुत्र को खींचकर मार दिया गया, लेकिन सरकार का कोई प्रतिनिधि पीड़ित परिवार से मिलने नहीं गया.”
जगदंबिका पाल ने दावा किया कि राज्य सरकार के अल्पसंख्यक मंत्री स्वयं लोगों को भड़का रहे हैं, जिससे पिछले एक सप्ताह से मुर्शिदाबाद में हालात बेकाबू हैं। उन्होंने कहा कि स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद पैरामिलिट्री फोर्स की तैनाती करनी पड़ी। उन्होंने कहा, “जब हाईकोर्ट को स्वतः संज्ञान लेना पड़े और निर्देश पर केंद्रीय बल तैनात करना पड़े, तो यह स्पष्ट संकेत है कि राज्य प्रशासन पूरी तरह से फेल हो चुका है। अब समय आ गया है कि वहां राष्ट्रपति शासन लागू किया जाए।”
जगदंबिका पाल ने विपक्षी दलों द्वारा प्रवर्तन निदेशालय (ED) पर लगातार किए जा रहे हमलों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा ईडी को समाप्त करने की मांग भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने जैसा है।
उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से राहुल गांधी और सोनिया गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि, “नेहरू द्वारा शुरू की गई एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड की 2000 करोड़ की संपत्ति को यंग इंडिया ट्रस्ट में ट्रांसफर करना एक बड़ा भ्रष्टाचार है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।”
पाल ने कांग्रेस नेता रॉबर्ट वाड्रा पर भी हमला करते हुए कहा कि “किसानों से कौड़ियों के भाव जमीन खरीदना, लैंड यूज बदलवाकर महंगे दाम पर बेचना और उससे हुई मनी लॉन्ड्रिंग पर यदि ईडी कार्रवाई करती है, तो विपक्ष उसे रोकना चाहता है।” उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष चाहता है कि नेता भ्रष्टाचार करते रहें और जांच एजेंसियां निष्क्रिय बनी रहें।
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