नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग केस में शनिवार (29 नवंबर) की अहम सुनवाई के दौरान दिल्ली की राऊज़ एवेन्यू कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की चार्जशीट पर संज्ञान लेने का अपना फैसला स्थगित कर दिया। अब अदालत 16 दिसंबर को यह निर्णय सुनाएगी कि ईडी द्वारा दायर विस्तृत आरोपपत्र पर आगे की कार्रवाई शुरू की जाए या नहीं। इस मामले में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सैम पित्रोदा, सुमन दुबे, यंग इंडियन, तथा डोटेक्स मर्चेंडाइस प्राइवेट लिमिटेड सहित कई प्रमुख नाम आरोपी के रूप में शामिल हैं।
यह मामला 2012 में भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की शिकायत से शुरू हुआ। उनके आरोपों के आधार पर ईडी ने अब बंद हो चुके नेशनल हेराल्ड का प्रकाशक असोसिएटेड जनरल्स लिमिटेड (AJL) की संपत्तियों के कथित दुरुपयोग की जांच शुरू की। ईडी का दावा है कि कांग्रेस नेतृत्व ने यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के जरिए एक सुनियोजित साजिश रची, जिसके तहत लगभग ₹2,000 करोड़ मूल्य की संपत्तियाँ महज़ ₹50 लाख में हासिल की गईं। एजेंसी का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया पार्टी फंड और लोन का दुरुपयोग करके, फर्जी किराया रसीदों और फर्जी लेन-देन के माध्यम से पूरी की गई।
ईडी के अनुसार, सोनिया गांधी और राहुल गांधी दोनों यंग इण्डिया कंपनी में में 38-38% हिस्सेदारी रखते हैं, और इसी संस्था को कठपुतली कंपनी बनाकर संपत्ति हस्तांतरित की गई। एजेंसी ने आरोप लगाया है कि इस संरचना के माध्यम से गांधियों को लगभग ₹142 करोड़ का निजी लाभ पहुंचा।
ईडी ने PMLA की धाराओं 44 और 45 के तहत जो चार्जशीट दायर की है, उसमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सैम पित्रोदा, सुमन दुबे, दिवंगत मोतीलाल वोरा, दिवंगत ऑस्कर फर्नांडिस, यंग इंडिया और डोटेक्स मर्चेंडाइस को आरोपी बनाया गया है। केस की जड़ में IPC की धाराएँ धोखाधड़ी (420), आपराधिक विश्वासघात (406) और फर्जीवाड़े समेत कई प्रेडिकेट अपराध शामिल हैं।
National Herald money laundering case | Delhi's Rouse Avenue court deferred the order on cognisance of the ED charge sheet in the National Herald money laundering case.
The court has listed the matter for order on December 16.
— ANI (@ANI) November 29, 2025
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी (सोनिया गांधी), आर.एस. चीमा (राहुल गांधी) और प्रमोद दुबे (Dotex) ने किया, जबकि ईडी की ओर से ASG एस.वी. राजू पेश हुए।
7 नवंबर को विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने ईडी द्वारा फंड फ्लो और ट्रांजैक्शन की अतिरिक्त व्याख्या देने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया था। अदालत ने इस बात को महत्त्वपूर्ण माना कि BNSS की धारा 223 के तहत आरोपियों को प्रि-कॉग्निसेंस हियरिंग का अधिकार है और इस प्रक्रिया की अनदेखी नहीं की जा सकती। ईडी की ओर से जल्द जवाब दाखिल करवाने की मांग अदालत ने खारिज कर दी थी।
कांग्रेस नेताओं ने ईडी के आरोपों को अजीब और अभूतपूर्व बताते हुए खारिज किया है। पार्टी का दावा है कि फंड फ्लो न मिलने के आधार पर मामले को पहले ही आयकर विभाग द्वारा क्लीन चिट मिल चुकी है। उनका आरोप है कि यह कार्रवाई राजनीतिक प्रेरणा से प्रेरित है। फैसले का 16 दिसंबर तक टलना इस 10 साल पुराने विवाद में अनिश्चितता को और बढ़ा देता है। जब तक अदालत यह तय नहीं करती कि ईडी की चार्जशीट पर औपचारिक रूप से कार्रवाई शुरू होगी या नहीं, पूरा मामला एक निर्णायक मोड़ की प्रतीक्षा में है।
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