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Wednesday, April 22, 2026
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नेपाल के गृह मंत्री सुदान गुरुंग ने दिया इस्तीफा

आर्थिक संपत्तियों पर उठे सवालों की निष्पक्ष जांच के लिए लिया फैसला

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नेपाल के गृह मंत्री सुदान गुरुंग ने बुधवार (22 अप्रैल)को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए और अपनी आर्थिक संपत्तियों को लेकर उठी चिंताओं की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए एक फेसबुक पोस्ट में गुरुंग ने कहा कि उन्होंने सार्वजनिक आलोचना को गंभीरता से लिया और सार्वजनिक जीवन में नैतिक मानकों का पालन करने के लिए यह कदम उठाया।

उन्होंने कहा, “मैं, सुदान गुरुंग, चैत्र 13, 2082 (26 मार्च 2026) से गृह मंत्री के रूप में अपने कर्तव्यों का पूरी ईमानदारी से निर्वहन कर रहा हूं। हाल ही में, मेरे शेयरों और उनसे जुड़े मामलों को लेकर नागरिकों द्वारा उठाए गए सवाल, टिप्पणियां और सार्वजनिक चिंताओं को मैंने गंभीरता से लिया है।” उन्होंने  कहा कि किसी भी पद से पहले जनता का विश्वास सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने कहा, “मेरे लिए किसी भी पद से ज्यादा महत्वपूर्ण नैतिकता है और जनता के विश्वास से बड़ी कोई शक्ति नहीं है। आज की ‘जनरेशन जेड’ जो सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करती है, वही संदेश देती है कि सार्वजनिक जीवन स्वच्छ और नेतृत्व जवाबदेह होना चाहिए।”

गुरुंग ने व्यापक राजनीतिक संदर्भ और देश के अतीत में हुए बलिदानों का भी उल्लेख किया और कहा कि जब सवाल उठते हैं, तो जवाबदेही जरूरी होती है। उन्होंने कहा, “मेरे 46 भाई-बहनों के खून और बलिदान पर खड़ी सरकार पर जब सवाल उठते हैं, तो उसका एकमात्र उत्तर नैतिकता ही हो सकता है।”

अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि यह निर्णय पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा और किसी भी हितों के टकराव से बचाएगा। उन्होंने कहा,“इसलिए, मुझसे संबंधित मामलों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और पद पर रहते हुए किसी भी हितों के टकराव से बचने के लिए, मैं आज से गृह मंत्री पद से इस्तीफा देता हूं।” उन्होंने नागरिकों, मीडिया और युवाओं से सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और जवाबदेही बनाए रखने की अपील भी की।

इससे पहले, 9 अप्रैल को नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने अपनी पार्टी की सिफारिश पर श्रम, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा मंत्री दीपक कुमार साह को अनुशासनहीनता के आरोप में पद से हटा दिया था। प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि पार्टी की आचार संहिता और अनुशासन का उल्लंघन पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई।

आयोग की जांच के अनुसार, साह ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपनी पत्नी जूनू श्रेष्ठ को स्वास्थ्य बीमा बोर्ड में सदस्य पद पर बनाए रखा, जो लंबे समय से निष्क्रिय था। आयोग ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट पार्टी को सौंपते हुए कार्रवाई की सिफारिश की है।

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