राज्यसभा नामांकन रद्द होने पर मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, याचिका खारिज

तेलंगाना के आपराधिक मामले का खुलासा नहीं करने पर नामांकन रद्द; शीर्ष अदालत ने कहा- उपाय निर्वाचन आयोग के पास है

राज्यसभा नामांकन रद्द होने पर मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, याचिका खारिज

No relief for Meenakshi Natarajan from the Supreme Court regarding the cancellation of her Rajya Sabha nomination; petition dismissed.

राहुल गांधी की करीबी नेता और पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा चुनाव से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। शीर्ष अदालत ने उनके नामांकन पत्र रद्द किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा नामांकन खारिज किए जाने के बाद सामान्य तौर पर उपलब्ध उपाय निर्वाचन आयोग के समक्ष जाना होता है।

न्यायमूर्ति पी.के. मिश्रा और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदूरकर की पीठ ने माना कि मीनाक्षी नटराजन की याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी से पूछा, “निर्णय कितना भी गलत क्यों न हो, एक बार नामांकन खारिज हो जाने के बाद उसका उपाय सामान्यतः कहीं और होता है। क्या इस स्तर पर हस्तक्षेप करने का इस अदालत का कोई निर्णय है?”

मीनाक्षी नटराजन की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि यह ऐसा मामला है जिसमें अदालत को हस्तक्षेप करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उम्मीदवार को केवल ऐसे आपराधिक मामलों का खुलासा करना होता है जिनमें न्यूनतम दो वर्ष की सजा का प्रावधान हो। उनके अनुसार, इस मामले में केवल समन जारी किए गए थे और रिटर्निंग ऑफिसर ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम का हवाला देते हुए गलत तरीके से नामांकन पत्र खारिज किया।

मीनाक्षी नटराजन कांग्रेस नेता राहुल गांधी की टीम का प्रमुख चेहरा मानी जाती हैं और उन्हें मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए पार्टी का उम्मीदवार बनाया गया था। हालांकि उनके नामांकन पत्र की जांच के दौरान यह आरोप सामने आया कि उन्होंने तेलंगाना में दर्ज एक मामले का उल्लेख अपने हलफनामे में नहीं किया।

राज्यसभा चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा के आदेश में कहा गया कि उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद यह पाया गया कि नटराजन द्वारा नामांकन के साथ जमा किए गए फॉर्म-26 में एक न्यायालयीन शिकायत का उल्लेख नहीं किया गया था, जिससे हलफनामा अधूरा माना गया।

मध्य प्रदेश विधानसभा के एक अधिकारी के अनुसार, भाजपा उम्मीदवार महेश केवट ने रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि मीनाक्षी नटराजन ने तेलंगाना में दर्ज मामले की जानकारी अपने हलफनामे में छिपाई है।

इस बीच, मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने सभी तीन सीटें निर्विरोध जीत लीं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मीनाक्षी नटराजन ने कहा, “कोई निराशा नहीं है और न ही कोई झटका लगा है।”

वहीं, मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस घटनाक्रम को भारतीय राजनीति में अभूतपूर्व बताते हुए लोकतंत्र की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “भारतीय राजनीति में यह पहला ऐसा मामला है, जहां राज्यसभा का नामांकन रद्द किया गया है। यह पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। आम जनता के मन में यह सवाल पैदा हो रहा है कि क्या इस देश में लोकतंत्र बचेगा या देश निरंकुशता और तानाशाही की ओर बढ़ रहा है। यह एक महत्वपूर्ण घटना है, जो इसी सोच को दर्शाती है।”

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से इनकार के बाद मीनाक्षी नटराजन के सामने आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए निर्वाचन आयोग का रास्ता खुला हुआ है।

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