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Tuesday, July 21, 2026
होमदेश दुनियाटीएमसी बागियों पर विपक्ष नाराज़, सर्वदलीय बैठक से विपक्ष का वॉकआउट!

टीएमसी बागियों पर विपक्ष नाराज़, सर्वदलीय बैठक से विपक्ष का वॉकआउट!

उन्होंने कहा कि इन सांसदों के विलय को लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी नहीं मिली है और उनके खिलाफ दायर 20 अयोग्यता याचिकाएं अभी भी लंबित हैं।

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संसद के मानसून सत्र से पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों ने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ विरोध जताया। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया कि बैठक में पार्टी के कथित बागी सांसदों को आमंत्रित किए जाने के विरोध में विपक्षी दलों ने वॉकआउट किया।

महुआ मोइत्रा ने पत्रकारों से कहा कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, आम आदमी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वामपंथी दलों और शिवसेना (यूबीटी) समेत कई विपक्षी दलों ने बैठक से बाहर निकलने का फैसला किया। उनका आरोप था कि एक गैर-मान्यता प्राप्त गुट को बैठक में स्थान दिया गया, जबकि लोकसभा टेबल ऑफिस की सूची में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के 28 सांसद दर्ज हैं।

मोइत्रा ने सवाल उठाया कि पार्टी के 20 कथित बागी सांसदों को संसदीय कार्य मंत्री ने किस आधार पर बैठक में आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि इन सांसदों के विलय को लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी नहीं मिली है और उनके खिलाफ दायर 20 अयोग्यता याचिकाएं अभी भी लंबित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान के 91वें संशोधन के बाद अलग गुट के आधार पर मान्यता देने का कोई प्रावधान नहीं है।

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भी विपक्ष के वॉकआउट को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने संविधान की रक्षा तथा आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना के समर्थन में यह कदम उठाया है। उनका कहना था कि किसी मामले में अंतिम फैसला आने से पहले कोई निष्कर्ष निकालना पूरी तरह असंवैधानिक है।

बैठक के बाद समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने भी सरकार पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि टीएमसी नेताओं ने बैठक में यह मुद्दा उठाया कि आधिकारिक तृणमूल कांग्रेस सांसदों के बजाय पहले कथित बागी सांसदों की सूची क्यों दिखाई गई। उन्होंने इसे सरकार का अलोकतांत्रिक कदम बताया।

सर्वदलीय बैठक से विपक्ष के वॉकआउट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) की सांसद महुआ माजी ने कहा कि आज देश में विभिन्न तरीकों से सांसदों को लालच देकर राजनीतिक दलों को सुनियोजित ढंग से तोड़ा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में बगावत करने वाले सांसदों को सर्वदलीय बैठक में बुलाया गया, जबकि स्पीकर ने अभी तक उन्हें मान्यता नहीं दी है।

महुआ माजी ने परिसीमन के मुद्दे का भी जिक्र करते हुए कहा कि यदि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन किया जाता है तो झारखंड जैसे राज्यों में अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित सीटों का काफी नुकसान होगा।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार यह भरोसा दिलाए कि किसी भी राज्य की सीटें कम नहीं होंगी और सभी विपक्षी दल इस पर सहमत हों, तो उनकी पार्टी अपने रुख पर पुनर्विचार कर सकती है। हालांकि, उन्होंने कहा कि अब तक इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई है।
 
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