पाकिस्तान में माइनॉरिटी कम्युनिटी के धार्मिक स्थलों पर हमले और उन्हें नुकसान पहुंचाना बहुत बड़ी चिंता का विषय बन गया है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नारोवाल जिले के सिराज गांव में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है कि एक ऐतिहासिक और करीब 100 साल पुराने हिंदू मंदिर को गिरा दिया गया। लाहौर से करीब 130 किलोमीटर दूर इस शांत गांव में हुई इस घटना से स्थानीय माइनॉरिटी हिंदू कम्युनिटी में बहुत ज़्यादा डर और बेचैनी फैल गई है। इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने पाकिस्तानी सरकार की कड़ी आलोचना की है और इस निंदनीय हरकत की कड़ी निंदा की है।
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India condemns demolition of a centuary old Hindu temple in Pakistan pic.twitter.com/JI1y8191Tt
— Sidhant Sibal (@sidhant) September 2, 2026
भारतीय विदेश मंत्रालय के ऑफिशियल स्पोक्सपर्सन रणधीर जायसवाल ने इस दुखद घटना पर ऑफिशियल बयान जारी करते हुए भारत सरकार की स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि भारत को चिंताजनक खबरें मिली हैं कि पाकिस्तान के नारोवाल जिले के सिराज गांव में सौ साल पुराने हिंदू मंदिर को गिरा दिया गया है। माइनॉरिटी की ऐतिहासिक पूजा की जगह पर तोड़-फोड़ की यह हरकत बहुत ही घिनौनी है और भारत इसकी कड़ी निंदा करता है। लोकल एडमिनिस्ट्रेशन की लापरवाही और इस धरोहर की सुरक्षा में उसकी नाकामी बहुत ही चिंताजनक और चौंकाने वाली है। ऐसी घटनाएं पाकिस्तान में माइनॉरिटी कम्युनिटी की बढ़ती इनसिक्योरिटी और उनकी धार्मिक आज़ादी के लगातार उल्लंघन को दिखाती हैं।
मदरसे का विस्तार या बारिश की वजह से हुआ हादसा?
इस मंदिर को गिराए जाने को लेकर अब दो अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। मिली जानकारी के मुताबिक, सौ साल पुराने इस मंदिर को 21 अगस्त को अचानक गिरा दिया गया। लोकल माइनॉरिटी ऑर्गनाइज़ेशन, हिंदू नागरिकों और पाकिस्तान मसीहा मिल्लत पार्टी (PMMP) ने गंभीर आरोप लगाया है कि लोकल धार्मिक कट्टरपंथियों ने मंदिर की जगह हड़पने के लिए यह काम किया। प्लान था कि मंदिर के हज़ार स्क्वायर मीटर हिस्से को पड़ोसी मदरसे के विस्तार में शामिल किया जाएगा और इसके लिए मंदिर का शिखर, ईंटों का काम और मेटल के बचे हुए हिस्से हटा दिए गए।
दूसरी ओर, पाकिस्तानी सरकारी एजेंसियों और इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) के अधिकारियों ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है। ETPB के सीनियर अधिकारियों ने दावा किया है कि हालांकि मंदिर सरकारी ऑफिस में रजिस्टर्ड नहीं था, लेकिन यह 100 से 125 साल पुराना और बहुत जर्जर था। हाल ही में हुई भारी बारिश के कारण जर्जर मंदिर अपने आप गिर गया और किसी ने इसे नहीं तोड़ा। उन्होंने साफ किया कि मंदिर की जमीन किसी को लीज पर नहीं दी गई थी, लेकिन पास की जमीन का विवाद कोर्ट में है।
अल्पसंख्यक संगठनों का आक्रामक रुख और भारत से कड़ी मांग
इस घटना के बाद पाकिस्तान में अल्पसंख्यक अधिकार संगठन आक्रामक हो गए हैं। 28 अगस्त को ‘पाकिस्तान मसीहा मिल्लत पार्टी’ के प्रेसिडेंट असलम परवेज सहोत्रा और लोकल हिंदू नेता रतन लाल ने पंजाब प्रांत के एडिशनल होम सेक्रेटरी से मुलाकात की और इस बारे में लिखित शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने घटना की तुरंत जांच, दोषियों के खिलाफ केस दर्ज करने और लापरवाही के लिए एडमिनिस्ट्रेटिव अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने यह भी कड़ा रुख अपनाया है कि तोड़े गए हिंदू मंदिर को उसके असली रूप में फिर से बनाया जाना चाहिए।
भारत सरकार ने भी पाकिस्तानी सरकार को उसकी इंटरनेशनल और नैतिक जिम्मेदारियों की याद दिलाई है। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मांग की है कि पाकिस्तान इस मामले की तुरंत, पारदर्शी और निष्पक्ष जांच करे। इस काम के दोषियों को सज़ा मिलनी चाहिए और उन्हें कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए। इसके साथ ही, भारत ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि पाकिस्तान में हिंदू, सिख और ईसाई अल्पसंख्यकों की पूजा की जगहों, संस्कृति और ज़िंदगी की रक्षा करना पाकिस्तान सरकार की पहली ज़िम्मेदारी है।
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