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Wednesday, October 21, 2026
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पाकिस्तान 2026 में गंभीर आर्थिक संकट के मुहाने पर: रिपोर्ट!

​ रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान की मौजूदा वार्षिक आर्थिक वृद्धि दर करीब 3 प्रतिशत है, जो देश की जनसंख्या वृद्धि दर से बस थोड़ा ही अधिक है।

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पाकिस्तान वर्ष 2026 में गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना कर सकता है। कमजोर आर्थिक वृद्धि, लगातार हो रहे आतंकी हमले और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी संभावित आपदाएं देश की मुश्किलें और बढ़ा रही हैं। यह बात निक्केई एशिया में प्रकाशित एक नई रिपोर्ट में कही गई है।

फरहान बोखारी द्वारा लिखी गई इस रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान 2024 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से 2027 तक के लिए मिले 7 अरब डॉलर के ऋण की बदौलत विदेशी कर्ज पर डिफॉल्ट से तो बच गया है, लेकिन 2026 में उसके सामने कई बड़ी चुनौतियां बनी रहेंगी।

​रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान की मौजूदा वार्षिक आर्थिक वृद्धि दर करीब 3 प्रतिशत है, जो देश की जनसंख्या वृद्धि दर से बस थोड़ा ही अधिक है। यह स्थिति अर्थव्यवस्था के लिए चिंताजनक मानी जा रही है।

आर्थिक वृद्धि को रफ्तार देने के लिए पाकिस्तान को कठोर आंतरिक सुधारों की जरूरत है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की करीब 25.7 करोड़ की आबादी में से 40 प्रतिशत से अधिक लोग अत्यंत गरीबी में जीवन यापन कर रहे हैं। इसके अलावा, देश में निरक्षरता का स्तर भी बेहद चिंताजनक है, जहां लगभग 40 प्रतिशत आबादी को निरक्षर माना जाता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान के भीतर जारी राजनीतिक खींचतान ने निवेशकों का भरोसा कमजोर किया है, खासकर उन निवेशकों का जो लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करना चाहते हैं। जब तक राजनीतिक संघर्ष खत्म नहीं होता, तब तक मध्यम और दीर्घकालिक निवेश को लेकर निवेशक सतर्क बने रहेंगे।

नई पूंजी निवेश में मजबूती के अभाव में पाकिस्तान के कम आर्थिक विकास के दुष्चक्र में फंसे रहने की आशंका जताई गई है।

इसके अलावा, पाकिस्तान हाल के वर्षों में भारी बारिश और बाढ़ से बड़े पैमाने पर तबाही झेल चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में देश में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत अधिक बारिश होने की संभावना है, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पाकिस्तान में पांच वर्ष से कम उम्र के लगभग एक-तिहाई बच्चे कुपोषण के कारण अवरुद्ध शारीरिक विकास (स्टंटिंग) का शिकार हैं। लंबे समय से तेज आर्थिक विकास न कर पाना और संपत्ति का समान वितरण न होना भी देश की बड़ी समस्याओं में शामिल हैं।​ 

 
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