संसद के मानसून सत्र के दूसरे सप्ताह की शुरुआत सोमवार (28 जुलाई) को पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर होने वाली बहस से होगी। इस बहस से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को तमिलनाडु के गंगैकोंडा चोलपुरम में अपने संबोधन के दौरान स्पष्ट किया कि भारत की आतंकवाद पर नीति समझौताविहीन और निर्णायक है। प्रधानमंत्री ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर के तहत मई में पाकिस्तान स्थित आतंकी शिविरों पर किए गए सटीक हमले भारत का स्पष्ट संदेश हैं कि आतंकवादियों और उनके आकाओं के लिए अब कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं है।” उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन ने देश में एक नई चेतना और आत्मविश्वास को जन्म दिया है।
प्रधानमंत्री राजेंद्र चोल प्रथम की 1000वीं जयंती पर आयोजित समारोह में शामिल होने पहुंचे थे, लेकिन इस अवसर पर भी उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। मोदी ने कहा, “विश्व ने देखा है कि भारत ने अपनी संप्रभुता पर खतरे के खिलाफ कैसा सशक्त और स्पष्ट जवाब दिया है। ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से हमने यह संदेश दिया है कि राष्ट्रविरोधियों के लिए कोई जगह नहीं है।”
लोकसभा में आज होने वाली इस महत्वपूर्ण बहस को लेकर माहौल काफी गर्म है। माना जा रहा है कि पीएम मोदी के बयान के जरिए सरकार ने बहस से पहले अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। वहीं विपक्ष, खासतौर पर कांग्रेस, सरकार को घेरने की तैयारी में है। दरम्यान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव मिलकर सरकार की आतंरिक सुरक्षा और राष्ट्रीय नीति पर सवाल उठाएंगे। विपक्ष का मुख्य तर्क यह रहेगा कि पीएम मोदी के शासनकाल में बार-बार बड़े आतंकी हमले हो रहे हैं।
विपक्ष खास तौर पर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान को भी उठाएगा, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को रोकने के लिए भारत पर व्यापार रोकने की धमकी दी थी और “पांच भारतीय फाइटर जेट्स के गिराए जाने” की बात भी कही थी।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने रविवार (27 जुलाई) को X पर लिखा, “ऑपरेशन सिंदूर के अचानक रोके जाने के बाद कांग्रेस ने विशेष दो दिवसीय संसद सत्र की मांग की थी, जिसे तब ठुकरा दिया गया। लेकिन अब भी यदि सरकार चर्चा के लिए तैयार है, तो यह लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत है।” इस बहस के लिए लोकसभा और राज्यसभा दोनों में 16 घंटे का समय तय किया गया है, जो संभावना है कि और लंबा खिंच सकता है। बहस की शुरुआत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा प्रश्नकाल के बाद की जाएगी। इसके बाद गृह मंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी सरकार की ओर से जवाब देंगे।
वहीं, कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रधानमंत्री मोदी भी सीधे हस्तक्षेप कर सकते हैं ताकि सरकार की आतंकवाद विरोधी नीति की मजबूत छवि संसद में सामने रखी जा सके। पहलगाम आतंकी हमले के बाद विपक्ष का आरोप है कि हमलावरों ने धार्मिक पहचान के आधार पर टूरिस्ट बस के यात्रियों को निशाना बनाया था। इसी घटना और ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में, सरकार की आतंकवाद नीति और कूटनीतिक रवैये को लेकर संसद में आज तीखी बहस होने की पूरी संभावना है।
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