उन्होंने कहा, “मैं उन्हें नहीं जानता। मैं उनसे कभी नहीं मिला। न्यूयॉर्क में एक-दो बार सार्वजनिक कार्यक्रमों में उन्हें बोलते हुए देखा है, लेकिन न तो उनसे बातचीत की और न ही उनके पास गया। मुझे उनके बारे में कोई जानकारी नहीं है।”
दुनिया के प्रभावशाली उद्योगपतियों, जैसे एलन मस्क और जॉर्ज सोरोस, के राजनीति और नीतिगत फैसलों पर प्रभाव के बारे में पूछे जाने पर पित्रोदा ने कहा कि इन लोगों का कुछ प्रभाव जरूर होता है, लेकिन वे राजनेताओं और दूसरे हितधारकों के साथ अपनी-अपनी भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा, “उनका कुछ प्रभाव है। लेकिन वे अपना काम करते हैं, राजनेता अपना काम करते हैं और लोग अपना काम करते हैं। हर किसी की अपनी भूमिका है और सभी का अपना योगदान है।”
कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रभावशाली लोग अपने हितों के अनुकूल नीतियों में बदलाव कराने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि वे किसी देश को चलाते हैं।
उन्होंने कहा, “वे अपने फायदे के लिए नीतियों को बदलने की कोशिश करते हैं, लेकिन वे किसी देश को नहीं चलाते। जब तक कोई देश दो लाख की आबादी वाला न हो, तब तक शायद यह अलग बात हो सकती है।”
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और एलन मस्क के बीच सोशल मीडिया मंच एक्स पर हुई बातचीत पर भी पित्रोदा ने टिप्पणी की। यह बातचीत भारत में मस्क की कंपनी स्टारलिंक की सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत से जुड़े मुद्दे पर हुई थी।
उन्होंने इस व्याख्या को खारिज किया कि मस्क के साथ राहुल गांधी की बातचीत को उनकी कंपनी को स्पेक्ट्रम आवंटित करने के समर्थन के तौर पर देखा जाना चाहिए।
पित्रोदा ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि राहुल गांधी ने इसका समर्थन किया है। राहुल गांधी यह नहीं कह रहे हैं कि मस्क को स्पेक्ट्रम दिया जाना चाहिए। इसे गलत तरीके से न समझें। राहुल गांधी ने मूल रूप से उनके एक छोटे से संदेश का जवाब दिया था, जो बिल्कुल ठीक है। इसका कोई खास मतलब नहीं था।”
उन्होंने इस बातचीत के राजनीतिक अर्थ निकालने से बचने की सलाह देते हुए कहा कि राहुल गांधी के जवाब को इस वादे के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए कि अगर कांग्रेस सत्ता में आती है, तो मस्क को लाइसेंस दे दिया जाएगा।
इस मसले पर पित्रोदा ने कहा, “इसका यह मतलब नहीं है कि अगर राहुल गांधी सत्ता में आए, तो वह एलन मस्क को लाइसेंस दे देंगे। इसका मतलब यह नहीं है। लेकिन लोग अलग-अलग अर्थ निकालते हैं।”



