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‘हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ’ कहकर हमारी सभ्यता को कम आंका गया: HT लीडरशिप समिट में बोले PM मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (6 दिसंबर)को हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट में भारत की आर्थिक प्रगति, वैश्विक चुनौतियों और पुराने आर्थिक विमर्श की भाषा पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि दुनिया अनिश्चितताओं से घिरी है, लेकिन भारत इन परिस्थितियों के बीच “स्थिरता, विश्वास और विकास का स्तंभ” बनकर खड़ा है।

PM मोदी ने कहा कि वित्तीय संकट, वैश्विक महामारी और राजनीतिक अस्थिरता के बीच दुनिया जहां मंदी की आशंका से जूझ रही है, वहीं भारत विकास को नई दिशा दे रहा है। उन्होंने कहा, “भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है। जब दुनिया मंदी की बात करती है, भारत विकास की कहानियां लिखता है। जब दुनिया विश्वास के संकट से गुजरती है, भारत विश्वास का स्तंभ बन जाता है।”

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि दुनिया आज विभाजित है, और ऐसे समय में भारत एक “सेतु-निर्माता” की भूमिका निभा रहा है। समिट में PM मोदी ने दशकों पहले गढ़े गए आर्थिक शब्द ‘हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ’ पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि भारत की तेज आर्थिक वृद्धि इस शब्दावली की पोल खोलती है। प्रधानमंत्री ने सवाल उठाया, “आज भारत की जो तेज ग्रोथ हो रही है, क्या आपने कहीं सुना कि इसे हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ कहा जाता है? यह शब्द तब इस्तेमाल हुआ जब भारत 2-3% वृद्धि दर के लिए तरसता था। यह गुलामी की मानसिकता का प्रतिबिंब था।”

उन्होंने कहा कि आर्थिक प्रदर्शन को किसी धर्म या आस्था से जोड़ना न सिर्फ गलत था बल्कि सामूहिक रूप से भारतीय सभ्यता को नीचा दिखाने का प्रयास भी था। मोदी ने आरोप लगाया, “पूरी परंपरा को गरीबी का पर्याय बना दिया गया। यह सिद्ध करने की कोशिश हुई कि धीमी विकास दर का कारण भारतीय, विशेषकर हिंदू सभ्यता है।”

प्रधानमंत्री ने कुछ ‘तथाकथित बुद्धिजीवियों’ पर तंज कसते हुए कहा कि वे हर मुद्दे में सांप्रदायिकता खोज लेते हैं, लेकिन ‘हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ’ जैसे शब्द पर कभी सवाल नहीं उठाते। उनके अनुसार, “यह शब्द किताबों और रिसर्च पेपर्स में शामिल किया गया, लेकिन किसी ने यह सवाल नहीं उठाया कि एक सभ्यता के साथ ऐसा लेबल क्यों जोड़ा जा रहा है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि गुलामी की सोच ने भारत के रक्षा निर्माण ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया। उन्होंने याद दिलाया, भारत कभी विश्व का प्रमुख हथियार निर्माता था। विश्व युद्धों के दौरान भारतीय हथियारों की बड़ी मांग थी। लेकिन आज़ादी के बाद व्यवस्था में मौजूद लोगों ने ‘भारत में बने हथियारों’ को कमतर आंकना शुरू कर दिया। मोदी के अनुसार, इसी मानसिकता का परिणाम था कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा रक्षा आयातक बन गया।

हिंदुस्तान टाइम्स समिट में प्रधानमंत्री मोदी का भाषण एक व्यापक राजनीतिक-सामाजिक संदेश लेकर आया, भारत की तेज आर्थिक वृद्धि पर जोर, पुरानी आर्थिक अवधारणाओं की आलोचना, वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका और आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की आवश्यकता।

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