भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिटेन दौरे पर हैं। अपने दो दिवसीय दौरे पर पीएम भारत-ब्रिटेन के रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाले कुछ समझौतों पर हस्ताक्षर करेंगे। इनमें सबसे अहम होगा मुक्त व्यापार समझौता (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) जिसकी बदौलत दोनों देशों के बीच व्यापार में जबरदस्त बढ़ोतरी होने की संभावना है।
ऐसे में यह जानना अहम है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिटेन के अपने चौथे दौरे में जिस मुक्त व्यापार समझौते यानी एफटीए पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं, वह आखिर होता क्या है? भारत और ब्रिटेन के बीच इस समझौते के बाद किन-किन वस्तुओं के निर्यात और आयात में बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है? किन सेक्टरों को इससे सबसे ज्यादा फायदा होने की संभावना है? इसके अलावा भारत-ब्रिटेन के रिश्ते इससे किस तरह प्रभावित होंगे?
रिपोर्ट्स की मानें तो भारत को एफटीए के तहत सबसे बड़ा फायदा निर्यात क्षेत्र में मिलेगा। भारत का निर्यात आने वाले कुछ वर्षों में 10 से 12 अरब डॉलर (करीब 86 हजार करोड़ से 1.1 लाख करोड़ रुपये) तक बढ़ सकता है।
ब्रिटिश अखबार ‘द गार्डियन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस समझौते से भारत की अधिकतर वस्तुओं-सेवाओं पर आयात शुल्क खत्म कर दिया जाएगा। इससे भारत के निर्यात सेक्टर को ब्रिटेन में सामान बेचने के जबरदस्त मौके मिलेंगे।
एफटीए के जरिए भारत के सेवा क्षेत्र को भी काफी फायदा मिलने की संभावना है। दरअसल, भारत वस्तुओं के साथ सेवाओं का बड़ा प्रदाता है। खासकर पेशेवर सेक्टर्स में, जैसे वित्तीय सेवाओं में, आईटी सेक्टर में और शिक्षा क्षेत्र में।
भारत के सेवा क्षेत्र के लिए ब्रिटेन का लगातार बढ़ता वित्तीय और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर काफी बेहतर बाजार है। दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते में एक अहम नियम यह रखा गया है कि इससे ब्रिटेन में काम कर रहे भारतीय कर्मियों को सामाजिक सेवा के लिए किए जाने वाले भुगतान से तीन साल की छूट मुहैया कराई जाएगी।
भारत और ब्रिटेन के बीच 2024 तक द्विपक्षीय व्यापार करीब 42.6 अरब पाउंड (करीब पांच लाख करोड़ रुपये) का रहा। इस एफटीए के लागू होने के बाद दोनों देश अब व्यापार को 2040 तक हर साल 25.5 अरब पाउंड बढ़ाने की उम्मीद कर रहे हैं। 2030 तक दोनों के बीच का व्यापार करीब 120 अरब पाउंड तक पहुंचने की उम्मीद जताई गई है।
संसद सत्र का चौथा दिन, लोकसभा स्थगित, विपक्ष ने किया प्रदर्शन!