79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार(15 अगस्त) को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की प्रशंसा करते हुए इसे दुनिया का सबसे बड़ा गैर-सरकारी संगठन बताया। उन्होंने कहा कि RSS की स्थापना को इस वर्ष 100 साल पूरे हो रहे हैं और यह संगठन हमेशा से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा, “आज, मैं गर्व के साथ कहना चाहता हूँ कि 100 वर्ष पहले, एक संगठन का जन्म हुआ – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस)। राष्ट्र की सेवा के 100 वर्ष एक गौरवपूर्ण, स्वर्णिम अध्याय हैं। ‘व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण’ के संकल्प के साथ, माँ भारती के कल्याण के उद्देश्य से, स्वयंसेवकों ने अपना जीवन मातृभूमि के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया… एक तरह से, आरएसएस दुनिया का सबसे बड़ा गैर सरकारी संगठन है। इसका 100 वर्षों का समर्पण का इतिहास है।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संघ की प्रशंसा करते हुए कहा कहा, “हमें इसकी यात्रा और राष्ट्र के प्रति इसके द्वारा की गई निस्वार्थ सेवा पर गर्व है।” उन्होंने संगठन को दशकों से सामाजिक कल्याण, आपदा राहत और सामुदायिक निर्माण में योगदान देने का श्रेय दिया।
आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत हैं, इस वर्ष 26 अगस्त से अपने शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में भव्य समारोह आयोजित करने जा रहा है। इसका मुख्य कार्यक्रम ‘100 ईयर्स ऑफ संघ यात्रा न्यू होराइजन्स’ शीर्षक से 26 से 28 अगस्त तक विज्ञान भवन, दिल्ली में होगा। इस आयोजन में श्री भागवत समाज के विभिन्न वर्गों से संवाद करेंगे। कार्यक्रम में 17 क्षेत्रों — जैसे मीडिया, कूटनीति, धर्म और शिक्षा के प्रभावशाली व्यक्तियों के साथ व्याख्यान, संवाद और चर्चाएं होंगी। इसी तरह के कार्यक्रम नवंबर में बेंगलुरु, और अगले वर्ष फरवरी में कोलकाता व मुंबई में भी आयोजित किए जाएंगे।
इस आयोजन में सभी देशों के राजनयिकों को आमंत्रित किया जाएगा, लेकिन पाकिस्तान, तुर्की और बांग्लादेश के राजदूतों को निमंत्रण नहीं भेजा जाएगा। प्रधानमंत्री के इस बयान ने आरएसएस की राष्ट्र निर्माण में भूमिका को एक बार फिर राष्ट्रीय मंच पर रेखांकित किया, वहीं संगठन के 100 साल पूरे होने पर होने वाले समारोह को लेकर उत्सुकता भी बढ़ा दी है।
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