एनडीए (NDA) नेताओं ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि आरजेडी जानबूझकर इस तरह के पोस्टरों के माध्यम से जनता की भावनाओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। एनडीए के प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि “बिहार का नायक” जैसा टैग राज्य के असली नायकों का अपमान है, और चुनावी लाभ पाने के लिए आरजेडी भावनात्मक राजनीति कर रही है।
वहीं, आरजेडी नेताओं का कहना है कि तेजस्वी यादव युवाओं की उम्मीदों के प्रतीक हैं और राज्य के विकास के लिए नई सोच लेकर आए हैं। पार्टी का मानना है कि पोस्टर जनता के विश्वास और उम्मीदों को दर्शाता है, जिसमें तेजस्वी यादव को बदलाव के प्रतीक के रूप में पेश किया गया है।
इस पोस्टर विवाद ने बिहार के सियासी तापमान को और बढ़ा दिया है। एक ओर एनडीए इसे राजनीतिक नाटक बता रहा है, तो दूसरी ओर महागठबंधन इसे जनता के समर्थन का संकेत बता रहा है। चुनावी मौसम में इस तरह की प्रतीकात्मक बयानबाजी और पोस्टर वार से राज्य की राजनीति और अधिक गरमा गई है, जिससे आगामी चुनाव में प्रचार युद्ध और तेज होने की संभावना है।
चिराग पासवान बोले- बिहार ने तेजस्वी को 15 साल दिए, अब बदलाव तय!



