‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर गरमाई सियासत, चीन-कांग्रेस पर निशाना!

सरकार ने भारतीय सेना के पराक्रम, आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस और कांग्रेस के पुराने रिकॉर्ड को कठघरे में खड़ा किया।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर गरमाई सियासत, चीन-कांग्रेस पर निशाना!

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संसद के दोनों सदनों में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और पहलगाम आतंकी हमले को लेकर जोरदार बहस हुई, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा, सीजफायर, आतंकवाद, चीन, पाकिस्तान और सेना की रणनीति पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। जहां विपक्ष ने सरकार की रणनीतिक अस्पष्टता, सीजफायर की घोषणा के स्रोत और सीमा विवाद पर सवाल उठाए, वहीं सरकार ने भारतीय सेना के पराक्रम, आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस और कांग्रेस के पुराने रिकॉर्ड को कठघरे में खड़ा किया।

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लोकसभा में कहा कि “भारत को पाकिस्तान से खतरा तो है, लेकिन असली खतरा चीन से है।” उन्होंने पूछा कि 2014 में भारत का क्षेत्रफल कितना था और आज कितना है? साथ ही, उन्होंने सीजफायर पर सवाल उठाते हुए कहा, “सरकार को बताना चाहिए कि सीजफायर किसके दबाव में हुआ और क्यों सोशल मीडिया से इसकी जानकारी मिली?” उन्होंने यह भी पूछा कि “हमारे देश की सीमाएं सुरक्षित क्यों नहीं हैं?” और “आर्थिक मोर्चे पर सरकार क्यों विफल हो रही है?”

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राज्यसभा में कहा कि “ऑपरेशन सिंदूर” पूरी तरह सफल रहा। इसके तहत उन्हीं आतंकियों को मार गिराया गया जिन्होंने पहलगाम में 26 निर्दोष लोगों की हत्या की थी। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन से दुनिया को स्पष्ट संदेश गया कि भारत अब आतंक के आकाओं को बख्शेगा नहीं।

राजनाथ ने बताया कि यह कार्रवाई तीनों सेनाओं की गहन तैयारी और रणनीतिक सोच का नतीजा थी। खास बात यह रही कि सभी आतंकी मारे गए और किसी आम नागरिक को नुकसान नहीं हुआ।

गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष खासकर कांग्रेस पर करारा हमला बोला। उन्होंने कहा कि “पहले आतंकी घुसते थे, अब वीजा देकर बुलाया जाता था।” उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने आतंक के खिलाफ बने पोटा कानून को खत्म करके आतंकवादियों को बचाया। शाह ने 1986 से लेकर 2005 तक हुए हमलों का ज़िक्र करते हुए कहा कि दाऊद, टाइगर मेमन, भटकल ब्रदर्स सभी कांग्रेस शासन में भागे।

उन्होंने यह भी कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीर में पत्थरबाजी और आतंकी जनाजे की घटनाएं समाप्त हो गई हैं। अब आतंकियों को वहीं दफनाया जाता है, और उनका महिमामंडन नहीं होता।

डीएमके सांसद कनिमोझी ने कहा कि गृह मंत्री की बातों से लगता है कि विपक्ष देशभक्त नहीं है। उन्होंने कहा कि ‘हमने कभी देश को असफल नहीं होने दिया’ और ऑपरेशन सिंदूर जैसे मुद्दों पर सभी दलों का समर्थन सरकार के साथ है।

शाह ने कहा कि कांग्रेस शासन में 1962 में 30,000 वर्ग किलोमीटर ज़मीन चीन को दे दी गई, और नेहरू ने तब कहा था कि “वहां घास का तिनका भी नहीं उगता, तो ज़मीन की क्या ज़रूरत?”

उन्होंने यह भी कहा कि राजीव गांधी फाउंडेशन ने चीन से एमओयू किया, और जब भारतीय सेना बॉर्डर पर थी, तब राहुल गांधी चीनी राजदूत से मिल रहे थे।

सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही पक्षों ने भारतीय सेना के पराक्रम की खुले दिल से प्रशंसा की। अखिलेश यादव ने भी कहा, “हमें अपनी फौज पर गर्व है।” उन्होंने तंज में यह भी कहा कि सरकार पीछे क्यों हट गई? जबकि मीडिया को देखकर लग रहा था कि “POK हमारा हो जाएगा”।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चली इस लंबी बहस ने साफ किया कि राष्ट्रवाद, सुरक्षा और विदेश नीति अब केवल सरकार के ही मुद्दे नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक विमर्श के केंद्र में हैं।
जहां सत्तापक्ष अपनी सैन्य नीति को सफल बता रहा है, वहीं विपक्ष पारदर्शिता, रणनीतिक स्थिरता और सीमाओं की सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है।

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