प्रदीप भंडारी ने बताया, “आरोपी कहता है कि केस खत्म करना है। मिडिलमैन फिर कहता है कि सीएम के साथ सब कुछ डिस्कस हो चुका है और वह पीछे नहीं हट सकते, क्योंकि रकम को कई लोगों में बांटना है।”
उन्होंने इस मामले में तीन गंभीर सवाल उठाए। क्या सीएम और उनकी पत्नी रेप केसों को खत्म करने के लिए पैसे लेकर सिंडिकेट चला रहे हैं? क्या सीएम का दफ्तर भ्रष्टाचार का सिंडिकेट बन गया है? क्या यह कोई अकेला मामला नहीं है, बल्कि एक बड़े सिंडिकेट का हिस्सा है?
प्रदीप भंडारी ने कहा, “आज केजरीवाल को जवाब देना होगा कि भ्रष्टाचार की सीमा इस हद तक चली गई है कि अब रेप पीड़ितों को भी केजरीवाल और मान सरकार नहीं छोड़ रही है। क्या वे पंजाब में भी उसी तरह का सिंडिकेट चला रहे हैं जैसा उन्होंने दिल्ली में चलाया था?”
प्रदीप भंडारी ने झारखंड में छात्रों के प्रदर्शन के मामले पर भी हेमंत सोरेन सरकार और राहुल गांधी को घेरा।
उन्होंने कहा, “झारखंड में छात्रों ने प्रदर्शन किया और पूरे देश ने उनका साथ दिया, लेकिन अब जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है। यह सामने आ रहा है कि जिस कंपनी टीडीपीएल को परीक्षा कराने की जिम्मेदारी झारखंड सरकार ने दी थी, वह एक ब्लैकलिस्टेड कंपनी थी और उसने अभी तक टेंडर तक जारी नहीं किया है।”
प्रदीप भंडारी ने आरोप लगाया कि टीटीपीएल ने आगे एक तीसरी बेनामी कंपनी, पीकर टेक्नोलॉजी को एग्रीमेंट दे दिया, लेकिन इस एग्रीमेंट का कोई कागज मौजूद नहीं है और पूरा लेन-देन कैश में हुआ है।
उन्होंने कहा, “सीआईडी के सामने पीकर टेक्नोलॉजी के निदेशक ने कबूल किया है कि हमें जो टेंडर दिया गया था, उसकी कोई कॉपी नहीं है और पूरा ट्रांजैक्शन कैश में हुआ। इससे ये साबित होता है कि किस तरीके से राहुल गांधी और हेमंत सोरेन छात्रों के साथ न्याय करते हैं।”
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि जांच में जो तथ्य सामने आ रहे हैं, वे गंभीर सवाल खड़े करते हैं कि झारखंड में छात्रों के भविष्य के साथ कैसे खिलवाड़ किया जा रहा है।
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