दिल्ली हाई कोर्ट ने दास और रांका की ओर से पेश वकील से कहा कि जब मामला आज एसईएम कोर्ट के समक्ष सूचीबद्ध है, तो सीधे हाई कोर्ट आने की क्या आवश्यकता है। अदालत ने कहा कि पहले यह देखा जाए कि दोपहर 2 बजे एसईएम कोर्ट में क्या आदेश आता है, उसके बाद कानून के तहत उपलब्ध विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।
हाई कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि यदि शाम 4 बजे तक एसईएम कोर्ट का फैसला याचिकाकर्ताओं के पक्ष में आ जाता है, तो विवाद वहीं समाप्त हो जाएगा। वहीं, यदि फैसला उनके पक्ष में नहीं आता है, तो वे पहले सक्षम रिवीजन कोर्ट का रुख कर सकते हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट ने सौरव दास और आशुतोष रांका को संबोधित करते हुए कहा कि आपने बॉन्ड तोड़ा है, आप ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने बॉन्ड का उल्लंघन किया है। क्या बॉन्ड की शर्तों पर जोर देना इतना गैरकानूनी हो सकता है? डीनोटिफिकेशन के बाद बिना अनुमति जंतर-मंतर गए।
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि कुछ लोग ऐसे भी हो सकते हैं जो आपके नियंत्रण में न हों। हमने देश के बाहर भी ऐसा होते देखा है। दूसरी बार बॉन्ड तोड़ने पर क्या अधिकारी सख्त बॉन्ड की शर्त रखने के हकदार नहीं हैं?
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि जब आप जुलाई में पहले विरोध प्रदर्शन के दौरान आए थे, तब संगठन तो वही था, लेकिन मुद्दा बदल गया था। इसलिए सवाल यह उठता है कि जब ऐसे लोग हों जिनके मुद्दे लगातार बदलते रहते हैं, तो अगला सवाल यह होगा कि आप कौन हैं? आप क्या हैं? आपका संगठन क्या है और आपके संगठन का उद्देश्य क्या है?
कोर्ट ने उम्र पूछने के बाद सौरव और आशुतोष के लिए की टिप्पणी कि दोनों जेन जी नहीं हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट ने दास और रांका के वकील को सुझाव दिया कि वे याचिका वापस लेकर आज एसईएम कोर्ट में सुनवाई का इंतजार कर सकते हैं। इसके पहले सीजेपी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका ने याचिका दाखिल कर हाई कोर्ट से तत्काल सुनवाई की मांग की थी।
यह कदम एसईएम कोर्ट द्वारा दोनों की न्यायिक हिरासत को 21 अक्टूबर तक बढ़ाए जाने के बाद उठाया गया है। कोर्ट ने कहा था कि उनका बर्ताव कानून के प्रति कोई सम्मान नहीं दिखाता और इससे पता चलता है कि वे प्रतिबंधित इलाकों में विरोध-प्रदर्शन करने के आदी हैं।
