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Wednesday, November 4, 2026
होमन्यूज़ अपडेट‘चुनाव में धांधली हुई, लेकिन कोई सबूत नहीं!’

‘चुनाव में धांधली हुई, लेकिन कोई सबूत नहीं!’

जन सुराज के लीडर प्रशांत किशोर का दावा

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जन सुराज के फाउंडर और पूर्व इलेक्शन स्ट्रैटेजिस्ट प्रशांत किशोर ने आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ी है। बिहार असेंबली इलेक्शन में उनकी नई पार्टी के एक भी सीट न जीतने के बाद, उन्होंने दावा किया कि बिहार इलेक्शन में धांधली हुई थी। हालांकि, उन्होंने माना कि उनके पास फिलहाल इसका कोई सबूत नहीं है।

किशोर ने कहा कि उनकी पार्टी, जिसने पहली बार पूरे राज्य में चुनाव लड़ा था, की हार “चौंकाने वाली” थी। फिर भी, उन्होंने दावा किया कि उनके कैंपेन को ज़मीन पर अच्छा रिस्पॉन्स मिला था। उन्होंने कहा कि वोटर्स के वोटिंग बिहेवियर और उनकी पार्टी के पब्लिक डायलॉग कैंपेन के रिस्पॉन्स में बहुत बड़ा अंतर था। उन्होंने दावा किया, “कुछ गलत हुआ, कुछ अनदेखी ताकतें काम कर रही थीं”

“कुछ ऐसी ताकतें काम कर रही थीं जिन्हें रोकना नामुमकिन था। जिन पार्टियों के बारे में लोग ज़्यादा नहीं जानते, उन्हें लाखों वोट मिले। कुछ लोग मुझसे कह रहे हैं कि मैं आवाज़ उठाऊं कि EVM से छेड़छाड़ हुई है। लोग हारने के बाद ऐसे आरोप लगाते हैं। मेरे पास कोई सबूत नहीं है। लेकिन कई बातें आपस में नहीं जुड़तीं। पहली नज़र में ऐसा लगता है कि कुछ गड़बड़ हुई है, लेकिन मुझे नहीं पता कि क्या हुआ।” किशोर ने इंडिया टुडे टीवी की मैनेजिंग एडिटर प्रीति चौधरी के साथ एक इंटरव्यू में कहा।

किशोर ने NDA पर महिलाओं को पैसे बांटकर वोट को प्रभावित करने के भी गंभीर आरोप लगाए। चुनाव की घोषणा से लेकर वोटिंग के दिन तक महिलाओं को हर साल 10,000 रुपये दिए जाते थे। उनसे कहा गया था कि यह 2 लाख रुपये की पहली किस्त है। अगर वे NDA और नीतीश कुमार को वोट देंगी, तो उन्हें बाकी पैसे मिल जाएंगे। किशोर ने कहा, “मुझे याद नहीं कि देश में, बिहार में किसी भी सरकार ने पचास हज़ार महिलाओं को इतने पैसे दिए हों।”

उन्होंने जन सुराज के खिलाफ काम करने वाले एक और बड़े फैक्टर को ‘लालू के जंगल राज’ के लौटने का डर बताया। किशोर ने कहा, “आखिरी फेज में वोटर्स को लगने लगा था कि जन सुराज पावर में आने की हालत में नहीं है। उस समय उन्हें डर था कि अगर उन्होंने हमें वोट दिया और हम जीत नहीं पाए, तो लालू के जंगल राज को फिर से मौका मिल जाएगा। इसीलिए कुछ लोग मुंह मोड़ गए।”

जब क्रिटिक्स ने कहा कि वह अपने पॉलिटिकल करियर की यादें लिख रहे हैं, तो किशोर ने जवाब दिया, “ये वही लोग हैं जो मेरी जीत के समय ताली बजा रहे थे। अगर वे आज मेरी यादें लिख रहे हैं, तो यह उनके बारे में नहीं है, यह इस बारे में है कि मैं आगे क्या करता हूं। अगर मैं सफल होता हूं, तो वे फिर से ताली बजाएंगे। वे अपना काम कर रहे हैं और मैं अपना। मेरे आलोचक ही मुझे लेकर सबसे ज़्यादा उत्साहित हैं। इसका मतलब है कि मैं अभी खत्म नहीं हुआ हूँ। ‘कहानी अभी बाकी है’।” जन सुराज ने बिहार की 243 सीटों में से 238 पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकीन एक भी सीट नहीं जीत पाई। पार्टी को अंदाज़न 2–3% वोट मिले। ज़्यादातर उम्मीदवारों की ज़मानत भी ज़ब्त हो गई।

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