बिहार चुनाव से पहले सुशील मोदी की राह पर चल रहे प्रशांत किशोर?

अशोक चौधरी पर 200 करोड़ रुपये की अवैध जमीन खरीद का बड़ा खुलासा किया गया है। इसके साथ जमीन खरीद-फरोख्त से जुड़े सारे लेन-देन के दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं।

बिहार चुनाव से पहले सुशील मोदी की राह पर चल रहे प्रशांत किशोर?

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प्रशांत किशोर इन दिनों बिहार की राजनीति में उसी तरह सुर्खियों में हैं, जैसे 2017 में सुशील कुमार मोदी थे। उस समय सुशील मोदी ने लालू परिवार के खिलाफ 44 प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भ्रष्टाचार के दस्तावेज़ सार्वजनिक किए थे, जिसके चलते महागठबंधन सरकार टूट गई और नीतीश कुमार भाजपा के साथ आ गए थे। आज वही भूमिका प्रशांत किशोर निभाते नजर आ रहे हैं।

पीके ने बीते 90 दिनों में लगातार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एनडीए के चार बड़े नेताओं पर निशाना साधा है। इनमें उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय और भाजपा सांसद संजय जायसवाल शामिल हैं। वे इन नेताओं पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर नये-नये खुलासे कर रहे हैं।

मंगल पांडेय की पत्नी के खाते में 2.12 करोड़ रुपये आने का मामला उठाकर उन्होंने सीधे सवाल पूछा कि यह पैसा कहां से आया। साथ ही, दिलीप जायसवाल से लिये गये 25 लाख रुपये के कर्ज का मुद्दा भी उछाला।

सांसद संजय जायसवाल पर आरोप है कि उन्होंने अपने पेट्रोल पंप के चलते वर्षों तक फ्लाईओवर निर्माण रोका और निगम गाड़ियों के बिलों में गड़बड़ी की। सम्राट चौधरी पर उम्र और डिग्री फर्जीवाड़े का आरोप लगाया गया है, जबकि अशोक चौधरी पर 200 करोड़ रुपये की अवैध जमीन खरीद का बड़ा खुलासा किया गया है। पीके का दावा है कि जमीन खरीद-फरोख्त से जुड़े सारे लेन-देन के दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं।

जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने अशोक चौधरी से सफाई मांगी, मगर पार्टी में उन्हें समर्थन नहीं मिला। सवाल यह है कि जब नीतीश कुमार खुद को जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलते बताते हैं, तो क्या वे अपने मंत्रियों को सार्वजनिक सफाई देने के लिए मजबूर करेंगे? वहीं, भाजपा भी चुप्पी साधे है। शीर्ष नेतृत्व का मौन नरेन्द्र मोदी की पारदर्शी छवि के विपरीत माना जा रहा है।

अब नजरें इस बात पर हैं कि क्या प्रशांत किशोर की यह रणनीति भी 2017 की तरह बिहार की राजनीति में भूकंप लाएगी या फिर यह आरोप महज़ चुनावी शोर बनकर रह जाएंगे।

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