भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आगामी 22 अक्टूबर को सबरीमला अयप्पा मंदिर में दर्शन करने जाएंगी। यह यात्रा मंदिर में चल रहे थुलमास पूजा के अंतिम दिन होगी। राष्ट्रपति 22 से 24 अक्टूबर तक दो दिवसीय केरल दौरे पर रहेंगी और इस दौरान तिरुवनंतपुरम व कोट्टायम में आयोजित कई कार्यक्रमों में भाग लेंगी। त्रावणकोर देवस्वं बोर्ड (TDB) के अनुसार, सबरीमला मंदिर के द्वार 17 अक्टूबर को थुलमास पूजा के लिए खोले गए थे और इन्हें 22 अक्टूबर को बंद कर दिया जाएगा। मंदिर नवंबर में श्री चिथिरा अट्टाथिरुनाल के अवसर पर फिर से खोला जाएगा।
राष्ट्रपति की यह यात्रा उस समय हो रही है जब मंदिर स्वर्णमंडन (गोल्ड-प्लेटिंग) विवाद को लेकर राजनीतिक और धार्मिक हलकों में हलचल मची हुई है। हाल ही में मंदिर के द्वारपालक मूर्तियों पर लगे सोने की परत वाले तांबे के पैनलों के चोरी और अनियमितता के आरोप सामने आए हैं।
इसी प्रकरण में TDB सतर्कता विभाग ने उन्नीकृष्णन पोटी, जो 2019 और 2025 में हुए स्वर्णमंडन कार्यों के प्रायोजक व पूर्व सहयोगी थे, से लगातार दूसरे दिन पूछताछ की। लगभग तीन घंटे चली पूछताछ के बाद उन्होंने मीडिया से स्पष्ट जवाब देने से इनकार किया और केवल इतना कहा, “क्या मुझे एक नागरिक के रूप में स्वतंत्रता नहीं है? सब कुछ उच्च न्यायालय के सामने स्पष्ट हो जाएगा। सत्य की जीत होगी।”
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, 2019 और 2025 में मंदिर से हैदराबाद और चेन्नई की कार्यशालाओं में मरम्मत के लिए भेजी गई सोने की परत चढ़ी तांबे की चादरों के वजन और सोने की मात्रा में गड़बड़ियां पाई गईं हैं। TDB अध्यक्ष पी.एस. प्रसांत ने बताया कि बोर्ड ने देवस्वंम मंत्री वी.एन. वासवन से परामर्श के बाद केरल हाई कोर्ट से विस्तृत जांच की अनुमति मांगने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा, “मैंने मंत्री से मुलाकात की है। 1998 में विजय माल्या द्वारा किए गए स्वर्णमंडन से लेकर 2025 तक के सभी मामलों की जांच की जाएगी। इसमें सोने की कमी, संदेह और सभी विवादों को शामिल किया जाएगा।”
इस विवाद ने तब तूल पकड़ा जब केरल उच्च न्यायालय ने मरम्मत के लिए भेजे गए पैनलों की तुरंत वापसी का आदेश दिया और TDB को न्यायालय द्वारा नियुक्त सबरीमला विशेष आयुक्त को सूचित न करने के लिए फटकार लगाई। विवाद के बाद अब कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्यव्यापी आंदोलन की घोषणा की है। दोनों दलों ने मांग की है कि इस प्रकरण की CBI द्वारा उच्च न्यायालय की निगरानी में जांच कराई जाए।
राष्ट्रपति मुर्मू की आगामी यात्रा अब धार्मिक महत्व के साथ-साथ एक राजनीतिक और प्रशासनिक संवेदनशीलता का विषय बन गई है, क्योंकि सबरीमला विवाद एक बार फिर केरल की आस्था और शासन प्रणाली दोनों की परीक्षा ले रहा है।
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