बंगाल में जन आक्रोश और हिंदू जागृति, बदलाव का समय-चट्टोपाध्याय!

बंगाल का माहौल बदलाव का है, जनता में आक्रोश है और हिंदू जागृति का वातावरण बन रहा है। इस सिलसिले में इस बार हमारी शोभा यात्रा का उद्देश्य जनता को जागरूक करना है। 

बंगाल में जन आक्रोश और हिंदू जागृति, बदलाव का समय-चट्टोपाध्याय!

There-is-an-atmosphere-of-public-outrage-and-Hindu-awakening-in-West-Bengal-time-for-change-Jagannath-Chatterjee

पश्चिम बंगाल भाजपा महासचिव जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने मंगलवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत के दौरान प्रदेश की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने प्रदेश में नववर्ष के अवसर पर परिवर्तन की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके अलावा, बंगाल की वर्तमान परिस्थिति को ‘जन आक्रोश’ और ‘हिंदू जागृति’ का समय बताया।

बंगाल नववर्ष के अवसर पर जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने कहा कि हर साल हम बंगला नववर्ष बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं, लेकिन इस बार का नववर्ष उत्सव के साथ-साथ दुख भी लेकर आया है। बंगला पंचांग के हिसाब से यह हमारा पहला दिन है, जिसमें हर्ष, आनंद और उत्सव होता है। लेकिन बंगाल की मौजूदा स्थिति को देखकर हमें दुख हो रहा है। मुर्शिदाबाद में हिंदुओं की हत्या हो रही है, 26 हजार शिक्षकों की नौकरियां चली गई हैं।

उन्होंने आगे कहा कि बंगाल का माहौल बदलाव का है, जनता में आक्रोश है और हिंदू जागृति का वातावरण बन रहा है। इस सिलसिले में इस बार हमारी शोभा यात्रा का उद्देश्य जनता को जागरूक करना है।

हमारी झांकियों में आरजी कर घोटाले से लेकर शिक्षक भर्ती घोटाले, मोताबाड़ी, सैंथिया और मुर्शिदाबाद में वक्फ संशोधन कानून को लेकर हुई घटनाओं को दर्शाया गया है। मुल्लातंत्र पश्चिम बंगाल को पश्चिम बांग्लादेश बनाने में जुटा है। इसके खिलाफ हमने जनता को जागरूक करने के लिए यह कदम उठाया है।

साउथ 24 परगना के भांगड़ में हुई आगजनी और हिंसा पर भाजपा नेता ने कहा कि वक्फ संशोधन कानून को लेकर जो साजिश रची जा रही है, वह पूरे देश को अस्थिर करने की कोशिश है। खासकर पश्चिम बंगाल में हमें जानकारी मिल रही है कि इसमें कुछ बांग्लादेशी जमात भी शामिल हैं, जो घुसपैठ करवा रहे हैं। इसका कारण यह है कि यहां का प्रशासन प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इनका समर्थन कर रहा है।

मौलानाओं के साथ ममता बनर्जी की प्रस्तावित बैठक के बारे में पूछे जाने पर भाजपा नेता ने कहा कि ममता बनर्जी ईद की नमाज में तो शामिल होती हैं, लेकिन रामनवमी के जुलूस में नहीं आतीं। उनकी मंशा स्पष्ट है कि वे तुष्टिकरण की राजनीति करती हैं।

अगर ऐसी स्थिति में वे केवल इमामों के साथ बैठक करती हैं, उन्हें भत्ता और पैसे देकर भी अगर वे स्थिति को नियंत्रित नहीं कर पा रही हैं,तो इसका खामियाजा हम हिंदुओं को भुगतना पड़ रहा है। लेकिन जब तक भाजपा और हमारे कार्यकर्ता हैं, निश्चित रहें कि हम इस बंगाल को बदलेंगे।
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