एक्टर पुनीत इस्सर ने सीनियर एक्टर नसीरुद्दीन शाह के सरकार विरोधी रवैये की कड़ी आलोचना की है। इस्सर ने नसीरुद्दीन शाह को चुनौती दी कि अगर उन्हें सरकार की नीतियां पसंद नहीं हैं, तो वे राजनीति में आएं और चुनाव लड़कर लोगों के वोट हासिल करें। उन्होंने नसीरुद्दीन शाह पर कुछ खास मुद्दों पर ही स्टैंड लेने का भी आरोप लगाया।
पुनीत इस्सर ने साफ किया कि वे एक सीनियर एक्टर के तौर पर नसीरुद्दीन शाह का सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि नसीरुद्दीन शाह एक बेहतरीन एक्टर हैं और वे उनके सीनियर और टीचर भी हैं। हालांकि, उनका कहना है कि जनता के मुद्दों पर बोलते समय किसी को भी चुनिंदा रुख नहीं अपनाना चाहिए। इस्सर ने यह भी सवाल उठाया कि भारत और दुनिया में कई मुद्दों पर चुप्पी क्यों है।
इस्सर ने माना कि हर किसी को सरकार की आलोचना करने और अपनी राय रखने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि हालांकि, अगर सत्ता में बैठी सरकार पसंद नहीं है, तो राजनीति के मैदान में उतरकर चुनाव लड़ना चाहिए, लोगों का सपोर्ट हासिल करना चाहिए और सरकार को हराना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा सरकार अपनी मर्ज़ी से सत्ता में नहीं आई है, बल्कि देश के लोगों ने वोट देकर उसे चुना है।
Mumbai, Maharashtra: On actor Naseeruddin Shah, actor Puneet Issar says, “First of all, Naseeruddin Shah saheb is our senior. He has been our teacher, he is respected, and he is a very fine artist. But my only point is that when you speak, you should not be selective. On how many issues concerning the world and India do you remain silent, sitting quietly like a mute spectator? You single out one-sided, left-leaning and Naxal-leaning views and respond to everything from that ideological perspective. Look at these ‘Tukde-Tukde’ gangs and people from JNU. When it comes to convicted criminals in our country and terrorists who are currently in jail, they talk about their release and speak in their favour. If you support such people, then what does it mean to be Indian? You have every right to express your views and speak against the government. But if you do not like the government that has come to power, step into the political arena. Contest elections, win and defeat this government. This government did not come to power arbitrarily; the people of this country chose it and elected it…”
— IANS (@ians_india) October 28, 2026
इस्सर ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के घटनाक्रम, जेल में बंद आतंकवादियों के सपोर्ट में अपनाए गए रुख और दोषी अपराधियों की रिहाई की मांगों का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि जो लोग ऐसे मामलों में स्टैंड लेते हैं, उन्हें देश के बारे में अपनी सोच बतानी चाहिए।
जामिया आंदोलन को सपोर्ट करने पर विवाद
नसीरुद्दीन शाह ने हाल ही में जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्रों के आंदोलन का सपोर्ट किया था। छात्र स्टूडेंट यूनियन को फिर से शुरू करने के लिए आंदोलन कर रहे हैं। शाह ने मंगलवार को फेसबुक पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में गर्व से खुद को ‘मेंटल नक्सल’ कहा। “मैं गर्व से कहता हूं कि मैं एक ब्रेनवॉश्ड नक्सल हूं। मुझे नहीं पता कि गार्ड्स ने मेरे जैसे लोगों को और क्या-क्या निकनेम दिए हैं। देशद्रोही, टुकड़े-टुकड़े गैंग, और क्या-क्या।”
उन्होंने केंद्र सरकार पर एजुकेशन सिस्टम को कमजोर करने और युवाओं का हौसला तोड़ने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया। इससे पहले, शाह ने सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (SRFTI) में स्टूडेंट्स के आंदोलन का भी समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि JNU, SRFTI और अब जामिया में स्टूडेंट्स के साथ हो रहे कथित अन्याय पर ध्यान दिया जाएगा।
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