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Thursday, January 8, 2026
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जैव ईंधन क्रांति के लिए पीएम मोदी के प्रयासों की सराहना : पुरी !

केंद्रीय मंत्री पुरी ने इस बात पर जोर दिया कि जैव ईंधन के प्रति प्रधानमंत्री के प्रयास देश में व्यापक बदलाव ला रहे हैं और नागरिकों के जीवन में सुधार ला रहे हैं।

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केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोमवार को जैव ईंधन के माध्यम से भारत में एक नई क्रांति लाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की सराहना की, जिसके परिणामस्वरूप नामीबिया ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस (जीबीए) में शामिल हो गया है।

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री ने कहा कि जैव ईंधन एक ऐसी ऊर्जा है जो घरेलू और कृषि अपशिष्ट, अनाज या खराब अनाज से प्राप्त होती है और यह पर्यावरण-अनुकूल, स्वच्छ ईंधन देश के विकास को गति देने का एक सशक्त माध्यम भी है।

केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “नामीबिया जीबीए में शामिल हो गया है। स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में भारत की पहल और ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस फैमिली का विस्तार, वसुधैव कुटुम्बकम के मंत्र पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता का एक और प्रमाण है।”

केंद्रीय मंत्री पुरी ने इस बात पर जोर दिया कि जैव ईंधन के प्रति प्रधानमंत्री के प्रयास देश में व्यापक बदलाव ला रहे हैं और नागरिकों के जीवन में सुधार ला रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों ने भारत में ‘जैव ईंधन के माध्यम से बदलाव की एक नई क्रांति’ ला दी है। भारत की विकास यात्रा को गति देने वाला यह हरित ईंधन गाँवों से लेकर शहरों तक लोगों के जीवन को बदल रहा है और बेहतर बना रहा है।”

जैव ईंधन न केवल किसानों को आय अर्जित करने में मदद कर रहा है, बल्कि इसके विकास से खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में नए रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा, “किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ, यह ईंधन ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रहा है।”

हाल ही में आईएएनएस के साथ बातचीत में केंद्रीय मंत्री पुरी ने कहा कि इस वर्ष बायोफ्यूल ब्लेंडिंग 20 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो 2014 में मात्र 1.4 प्रतिशत था।

भारत आज दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा जैव ईंधन उत्पादक देश है।

आधिकारिक अनुमानों के अनुसार, इथेनॉल ब्लेंडिंग पहलों ने पिछले दस वर्षों में किसानों की आय में सुधार किया है। इसी के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजित हुए हैं, 1.75 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर सीओटू उत्सर्जन में कमी आई है और 85,000 करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है।

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