केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दशहरे की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि नशा, नाश की जड़ है, इसलिए इस अवसर पर हम नशा रूपी रावण को मारें। केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने अपने विजयादशमी संदेश में कहा कि विजयादशमी का पावन पर्व है।
देश पूरे उमंग और उत्साह के साथ बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व, अधर्म पर धर्म की विजय का पर्व मना रहा है। उन्होंने आगे कहा कि आज फिर रावण के पुतले जलेंगे।
मैं सभी देशवासियों को भाइयों-बहनों, भांजे-भांजियों को इस विजय पर्व की बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। हम सभी भी सन्मार्ग पर चलते हुए सदैव अच्छाई का साथ दें। अच्छाई का मतलब भगवान राम और बुराई ही तो रावण है। बुराई से दूर रहे।
उन्होंने आगे कहा कि आप सबके जीवन में मां की साधना का पर्व अभी पूर्ण हुआ है। मां की कृपा और आशीर्वाद बरसें। आप सुखी हो, आप आगे बढ़े और देश को आगे बढ़ाएं, लेकिन बार-बार मेरे मन में एक विचार आता है कि रावण को हर बार हम जलाते हैं। लेकिन क्या बुराइयां पूरी तरह जल पाती हैं?
कुछ घटनाएं मन को बहुत व्यथित करती हैं—जैसे कभी-कभी कोई घटना ऐसी आती है, जिससे अंतरात्मा ही इतनी व्यथित होती है कि शब्दों में बयां नहीं कर सकता। बेटियों के साथ दुराचार, अब ये रावण प्रवृत्ति है। बेटियों का सदैव सम्मान क्यों नहीं हो सकता? इस तरह की घटनाएं क्यों नहीं समाप्त की जा सकती? इस बुराई को मारना ही रावण को मारना है।
उन्होंने आह्वान किया है कि हम मां, बहन और बेटी का सम्मान करें और दूसरा नशा, नाश की जड़ है, और कई देश के बाहर की ताकतें भी देश को कमजोर करने के लिए युवाओं को कमजोर करने के लिए कितने तरह के नशे भेजने की कोशिश करती हैं। ये नशे की प्रवृति रावण हैं। हम नशे रूपी रावण को मारें, बेटियों का सम्मान करें, तभी सही अर्थों में विजयादशमी के पावन पर्व के पीछे की जो भावनाएं हैं वो पूरी होंगी।
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