भाजपा कार्यकर्ता श्रद्धानंद रोड स्थित कांग्रेस कार्यालय की ओर बढ़ते हुए राज्य सरकार और कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। उन्हें रोकने के लिए पुलिस ने रोड पर बैरेकेडिंग लगा रखी थी। प्रदर्शनकारियों ने इसे तोड़कर कार्यालय परिसर में प्रवेश करने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने मुख्य द्वार से पहले ही उन्हें रोक दिया। इसके बाद कुछ देर तक प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच खींचतान और धक्का-मुक्की की स्थिति बनी रही।
भाजपाइयों ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस नेताओं के खिलाफ नारेबाजी की, तो इसके जवाब में कांग्रेस भवन में मौजूद सैकड़ों नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी भाजपा के केंद्रीय नेताओं और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारे लगाए। स्थिति को देखते हुए कांग्रेस कार्यालय और आसपास के इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई। कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर मौजूद रहे और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।
पुलिस ने दोनों दलों के कार्यकर्ताओं को आमने-सामने आने से रोकने का प्रयास किया, हालांकि कुछ समय तक दोनों पक्षों के बीच नारेबाजी जारी रही। इससे पहले दिन में भाजयुमो के कार्यकर्ता जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में एकत्र हुए थे। वहां से निकले जुलूस ने जेपीएससी मुख्यालय का घेराव किया।
उनका कहना था कि राज्य में भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने की मांग दोहराई। कांग्रेस कार्यालय के बाहर भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार और कांग्रेस भर्ती घोटालों तथा भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है।
दूसरी ओर, कांग्रेस नेताओं ने भाजपा के प्रदर्शन को राजनीतिक नौटंकी करार देते हुए कहा कि जांच प्रक्रिया पहले से चल रही है और विपक्ष इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है। समाचार लिखे जाने तक कांग्रेस कार्यालय के बाहर स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में थी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए अतिरिक्त बल तैनात रखा गया है।
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