रविशंकर ने कांग्रेस के मीडिया प्रमुख द्वारा दिए गए उस स्पष्टीकरण को खारिज करते हुए कहा कि सोनिया गांधी केवल खड़गे के लिए कुर्सी की व्यवस्था कर रही थीं, यह तर्क पूरी तरह गलत है।
भाजपा सांसदों ने इसके बाद गोवा में कांग्रेस के एक कार्यक्रम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वहां भी वंदे मातरम के केवल दो पद गाए गए। प्रसाद ने इसे कांग्रेस की कथित विचारधारा और उसके रवैये से जोड़ते हुए सवाल उठाया कि आखिर राष्ट्रीय गीत को लेकर पार्टी का दृष्टिकोण क्या है।
उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस इस तरह की गतिविधियां करती रहेगी तो उसे भारत के स्वतंत्रता आंदोलन पर एकाधिकार का दावा करना बंद कर देना चाहिए। प्रसाद के मुताबिक, वंदे मातरम देश के स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला राष्ट्रीय गीत रहा है और इसकी ऐतिहासिक भूमिका को राजनीतिक सुविधा के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए।
रविशंकर प्रसाद ने मल्लिकार्जुन खड़गे के उन सवालों का भी जवाब दिया, जिनमें भाजपा नेताओं की स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका पर सवाल उठाए जाते हैं।
भाजपा सांसद ने कांग्रेस पर मुस्लिम लीग के साथ उसके पुराने राजनीतिक संबंधों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने 1936-37 के दौर में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच हुए राजनीतिक समझौतों का हवाला देते हुए दावा किया कि वंदे मातरम के केवल शुरुआती दो पद गाए जाने की परंपरा के पीछे मुस्लिम लीग की धार्मिक भावनाओं से जुड़ी आपत्तियां रही होंगी।
प्रसाद ने आरोप लगाया कि कांग्रेस आज भी कथित ‘वोट बैंक’ की राजनीति के कारण अपनी ही ऐतिहासिक परंपराओं से समझौता कर रही है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम की रचना या उसके निर्माण में भाजपा की कोई भूमिका नहीं थी, इसलिए इस मुद्दे को भाजपा बनाम कांग्रेस के राजनीतिक विवाद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, यह राष्ट्रीय भावना और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत से जुड़ा विषय है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने दिमागी नक्सल में किसी का नाम नहीं लिया था, उन्होंने केवल दिमागी नक्सलियों से सावधान रहने की बात कही थी। अमित शाह जी ने संकल्प लिया था कि हम माओवाद को समाप्त करेंगे और वो आज समाप्त हो चुका है।



