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आरबीआई: 1.9 लाख करोड़ नकदी डालने का फैसला बैंकिंग सेक्टर के लिए फायदेमंद!

अर्थशास्त्री टेरेसा जॉन के अनुसार, यह उपाय न केवल मार्च में नकदी की तंगी को दूर करेंगे, बल्कि दीर्घकालिक लिक्विडिटी की समस्या का भी समाधान करेंगे।

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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा बैंकों में 1.9 लाख करोड़ रुपये की नकदी डालने का निर्णय बैंकिंग सेक्टर के लिए सकारात्मक साबित हो रहा है। इसके प्रभाव से गुरुवार को सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों के साथ-साथ गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के शेयरों में तेजी देखी गई।

निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स 1.46% या 86.3 अंकों की बढ़त के साथ 5,976.75 के इंट्राडे उच्च स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी बैंक इंडेक्स 0.72% या 349.15 अंकों की तेजी के साथ 48,839.10 के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। वहीं, निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स में सुबह के कारोबार के दौरान 0.67% तक की बढ़त देखी गई।

आरबीआई ने बैंकिंग प्रणाली में लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए 50,000 करोड़ रुपये की दो किस्तों में 1 लाख करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की ओपन मार्केट ऑपरेशन (ओएमओ) खरीद की घोषणा की है। पहली नीलामी 12 मार्च और दूसरी 18 मार्च को होगी। इसके अलावा, 24 मार्च को 36 महीनों के लिए 10 बिलियन डॉलर की डॉलर-रुपया खरीद/बिक्री स्वैप नीलामी आयोजित की जाएगी। इन उपायों के जरिए 1.9 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी डाले जाने की उम्मीद है।

यह कदम टैक्स भुगतान से होने वाले नकदी बहिर्वाह और वित्त वर्ष के अंत में बैंकों की पूंजी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। आरबीआई ने कहा कि वह बाजार और लिक्विडिटी की स्थिति पर नजर बनाए रखेगा और आवश्यकतानुसार उचित कदम उठाएगा।

अर्थशास्त्रियों की राय: निर्मल बंग इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की अर्थशास्त्री टेरेसा जॉन के अनुसार, यह उपाय न केवल मार्च में नकदी की तंगी को दूर करेंगे, बल्कि दीर्घकालिक लिक्विडिटी की समस्या का भी समाधान करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि आरबीआई डॉलर की बिक्री जारी नहीं रखता है, तो मार्च के अंत तक लिक्विडिटी की स्थिति संतुलित हो सकती है और वित्त वर्ष 2026 में यह अधिशेष में जा सकती है।

सीआईटीआई के मुख्य अर्थशास्त्री समीरन चक्रवर्ती ने अनुमान लगाया कि मार्च के अंत तक लिक्विडिटी अधिशेष 1.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है और कुल अधिशेष लगभग 3 लाख करोड़ रुपये हो सकता है। फरवरी में मौद्रिक नीति समिति ने ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की कटौती की थी और उसके बाद आरबीआई ने नकदी प्रवाह बढ़ाने के लिए कदम उठाए थे।

बैंकों को राहत: पिछले कुछ महीनों से नकदी प्रवाह पर दबाव बना हुआ था, जिसका मुख्य कारण टैक्स भुगतान और रुपये की स्थिरता बनाए रखने के लिए आरबीआई द्वारा विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की बिक्री था। इससे पहले फरवरी में भी आरबीआई ने बैंकिंग प्रणाली में 1.7 लाख करोड़ रुपये की नकदी डाली थी।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बैंकों को राहत देते हुए प्रस्तावित लिक्विडिटी कवरेज रेश्यो (एलसीआर) और प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग से जुड़े नए मानदंडों को एक साल के लिए टाल दिया है। अब ये नियम 31 मार्च 2026 से पहले लागू नहीं किए जाएंगे।

मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई वित्तीय प्रणाली में कोई व्यवधान नहीं चाहता और नए नियमों को सुचारू रूप से लागू किया जाएगा। इससे पहले, कई बैंकों ने इन नियमों का विरोध किया था, क्योंकि उन्हें आशंका थी कि इससे नकदी संकट गहरा सकता है।

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