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तेजस्वी की RJD को सबसे ज्यादा वोट, फिर भाजपा–जेडीयू को ज्यादा सीटें क्यों?

बिहार चुनाव नतीजों का पूरा गणित

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बिहार विधानसभा चुनाव के ताज़ा नतीजों ने एक दिलचस्प तस्वीर पेश की है RJD को सबसे ज़्यादा वोट मिले, लेकिन सबसे ज़्यादा सीटें NDA झोली में डाल ले गया। तेजस्वी यादव की पार्टी ने भले ही 143 सीटों में से सिर्फ 25 सीटें जीती हों, लेकिन उसने 23% वोट शेयर हासिल किया, जो किसी भी एक पार्टी के मुकाबले सबसे अधिक है। यह उसके लिए एक सांत्वना है की इस पार्टी के पास उच्च जनसमर्थन था, लेकिन राजनीतिक लाभ जुटाने में आरजेडी फेल हुई।

इस बार के चुनाव में RJD ने कांग्रेस के साथ महागठबंधन का नेतृत्व किया था, लेकिन इसका प्रदर्शन निराशाजनक रहा। पिछली बार की तुलना में वोट शेयर में मामूली गिरावट आई 2020 में यह 23.11% था। इसके बावजूद, वह लोकप्रियता के पैमाने पर नंबर-1 पार्टी बनी रही।

राज्य में बीजेपी ने 89 सीटें जीतीं और JDU ने 85, जबकि दोनों ने सिर्फ 101–101 सीटों पर चुनाव लड़ा था। कम सीटों पर चुनाव लड़कर भी भाजपा का वोट शेयर बढ़कर 20.07% हो गया जो 2020 के 19.46% से ज्यादा है। दूसरी ओर, RJD को कई जगहों पर दूसरा स्थान मिला मतदाता समर्थन तो मिला, लेकिन जीत नहीं मिली। यह उसके कुल वोट शेयर को तो मजबूत करता है, लेकिन सीटें नहीं दिलाता।

इससे यह भी पता चलता है कि भले ही उन्हें कुल मिलाकर बहुत सारे वोट मिले हों, लेकिन वे वोट उन निर्वाचन क्षेत्रों में बर्बाद हो गए होंगे जहां वे नहीं जीते, या कम अंतर से जीते या कम अंतर से हारे।

ज़्यादा वोट शेयर का एक और कारण यह है कि राजद ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) या जनता दल (यूनाइटेड) की तुलना में ज़्यादा सीटों पर चुनाव लड़ा था – दोनों ने 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इसका मतलब है कि राजद के पास वोट जुटाने के लिए 42 ज़्यादा सीटें थीं, क्योंकि पार्टी के हारने वाले उम्मीदवार भी वोट शेयर में इज़ाफ़ा करते हैं। राजद को 1,15,46,055 वोट मिले, जबकि भाजपा को 1,00,81,143 लोगों ने वोट दिया।

फिर भी बीजेपी के पास RJD से तीन गुना से ज्यादा सीटें हैं यह पहला बड़ा संकेत है कि RJD की वोटिंग ‘विस्तृत’ है लेकिन ‘प्रभावी’ नहीं। कांग्रेस केवल 6 सीटें जीत सकी, जबकि उसने 61 पर दांव लगाया था। CPI(ML)L को दो, CPI(M) को एक सीट मिली और CPI खाली हाथ रही। कुल मिलाकर महागठबंधन की सीटें मिलकर 35 पर सिमट गईं।

यह चुनाव NDA के लिए बड़ी जीत लेकर आया, जिसमें गठबंधन ने कुल 202 सीटें हासिल कीं। इनमें भारतीय जनता पार्टी (BJP) सबसे आगे रही और उसने 89 सीटें जीतीं, जबकि जनता दल (यूनाइटेड) यानी JDU ने 85 सीटों पर विजय दर्ज की। इसके अलावा, लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) को 19 सीटें, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) को 5 सीटें, और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) को 4 सीटें मिलीं। सीटों का यह बंटवारा दिखाता है कि NDA ने न केवल व्यापक जनसमर्थन जुटाया, बल्कि अपने वोटों को प्रभावी ढंग से जीत में बदलकर बहुमत से भी आगे का आंकड़ा छू लिया।

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