प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (1 सितंबर) को दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी समारोह में देश के सामने खड़े नए खतरों को लेकर गंभीर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि भारत की एकता और अखंडता को तोड़ने तथा जनसांख्यिकी (demography) बदलने की साजिशें चल रही हैं, जो आंतरिक और बाहरी दोनों स्तरों से देश की सुरक्षा के लिए चुनौती हैं।
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा, “हमारी एकता, अखंडता और सुरक्षा को नष्ट करने की कोशिशें हो रही हैं। यह खतरा बाहरी भी है और आंतरिक भी। जनसांख्यिकी में बदलाव हमारे सामने बड़ी चुनौती है और हमें इसके प्रति सतर्क रहना होगा।” उन्होंने परिवार और समाज की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि परिवार की एकता और बुजुर्गों का मार्गदर्शन इस खतरे से निपटने में अहम है।
पीएम मोदी ने याद दिलाया कि आरएसएस की स्थापना 1925 में विजयादशमी के दिन हुई थी, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। “विजयादशमी असत्य पर सत्य, अंधकार पर प्रकाश और अन्याय पर न्याय की जीत का पर्व है। इस महान दिन पर संघ की स्थापना होना कोई संयोग नहीं था,” उन्होंने कहा। समारोह में प्रधानमंत्री ने विशेष स्मारक डाक टिकट और सिक्का भी जारी किया, जो संघ के 100 वर्षों की यात्रा और योगदान का प्रतीक है।
आरएसएस की नींव डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने नागपुर में रखी थी। शुरुआत एक सांस्कृतिक और अनुशासनात्मक स्वयंसेवक संगठन के रूप में हुई थी, जो अब देशभर में 60,000 से अधिक शाखाओं का संचालन करता है। आज लाखों स्वयंसेवक जनजातीय विकास, विज्ञान और तकनीक, उपभोक्ता अधिकार, श्रमिक संगठन और सामाजिक सेवा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय हैं। लगभग 30 संबद्ध संगठन राष्ट्रीय स्तर पर काम कर रहे हैं और जमीनी स्तर से लेकर प्रभावशाली वर्गों तक गहरी पहुंच बनाए हुए हैं।
यह भी पढ़ें:
“हमको ब्रिटिश नहीं, भारतीय सैनिकों ने आज़ाद कराया”,इस्राइल के हाइफ़ा के मेयर!
बरेली हिंसा: ड्रोन वीडियो में कैद हुए हंगामे के नए फुटेज, पुलिस-प्रदर्शनकारियों की भिड़ंत!
जेल में बंद पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति पर कैदी का हमला, सिर पर चोट; परिजनों में आक्रोश !



