परमहंस आचार्य ने कहा, “आज ममता बनर्जी चुनाव आयोग के अधिकारियों और ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठा रही हैं। यह उल्टा चोर कोतवाल को डांटे वाली कहावत है। जो व्यक्ति भारतीय संविधान और कानून व्यवस्था पर ही सवाल खड़ा कर रहा हो, वह राष्ट्रहित के खिलाफ काम कर रहा है।”
वहीं, अयोध्या के संत सीताराम दास ने भी ममता बनर्जी और इंडिया गठबंधन के नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि गठबंधन के नेता अराजकता और अशांति फैलाकर सत्ता हथियाना चाहते हैं।
सीताराम दास ने कहा, “ममता बनर्जी ने दिल्ली में जिस तरह के बयान दिए गए हैं, उससे लगता है कि इन नेताओं की बुद्धि भ्रष्ट हो चुकी है। ये लोग देश में दंगा और अराजकता फैलाकर कुर्सी पाना चाहते हैं, लेकिन देश की जनता इन्हें नकार रही है। ये लोग नक्सलवादी सोच को बढ़ावा देकर देश को तोड़ना चाहते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि चुनाव आयोग और मतदाता सूची शुद्धिकरण के लिए दिन-रात मेहनत करने वाले अधिकारियों पर सवाल उठाकर ममता बनर्जी भारतीय संविधान को ही कठघरे में खड़ा कर रही हैं। उनके परिश्रम पर कुठाराघात किया जा रहा है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
बता दें कि रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन की रैली के दौरान ममता बनर्जी की जुबान फिसल गई थी। भाषण के दौरान उन्होंने कहा था, “हमारा बंगाल लूट लिया, हम दिल्ली से लूट…” हालांकि तुरंत ही उन्होंने अपनी बात संभालते हुए कहा, “हम लूटेंगे नहीं, हम लोकतंत्र बचाएंगे।”
इसके अलावा उनके एक अन्य बयान ‘जो काफिर हैं, हर रोज डरते हैं’ को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है, जबकि समाजवादी पार्टी का कहना है कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है।



