संदीप पाठक का भाजपा में शामिल होना है केजरीवाल को बड़ा झटका

संदीप पाठक के पाला बदलने से पार्टी के संगठन और रणनीति पर होगा असर

संदीप पाठक का भाजपा में शामिल होना है केजरीवाल को बड़ा झटका

Sandeep Pathak's joining BJP is a big blow to Kejriwal

आम आदमी पार्टी (AAP) में राज्यसभा स्तर पर बड़ी टूट के का दर्द संदीप पाठक के दलबदलुओं में शामिल होने से दस गुना बड़ा हो चूका है। पार्टी के दो-तिहाई राज्यसभा सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में जाने की घटना ने जहां सियासी हलचल मचाई है, वहीं पाठक का जाना AAP की संगठनात्मक मजबूती और रणनीतिक दिशा पर गंभीर असर डालता दिख रहा है।

अरविंद केजरीवाल के करीबी माने जाने वाले पाठक का भाजपा में शामिल होना सभी के लिए अनपेक्षित और आश्चर्यजनक रहा है। एक वरिष्ठ AAP नेता का कहना है,  “हम कई झटकों के लिए तैयार थे, लेकिन संदीप पाठक का भाजपा में जाना कभी सोचा भी नहीं था।” बता दें की संदीप पाठक का पार्टी में दबदबा इतना था की केजरीवाल की गिरफ्तारी के दौरान उनसे मिलने की अनुमति पाने वाले सीमित लोगों में वह भी शामिल थे।

2022 के बाद से संदीप पाठक AAP के संगठनात्मक ढांचे के प्रमुख स्तंभ के रूप में उभरे थे। चुनावी रणनीति, डेटा विश्लेषण और सर्वे आधारित निर्णयों के कारण उन्हें पार्टी के रणनीतिकारकहा जाता था। पार्टी के भीतर उनकी तुलना भाजपा के वरिष्ठ नेता अमित शाह से भी की जाती थी।

पंजाब चुनाव 2022 में AAP की जीत में उनकी रणनीति का बड़ा योगदान रहा है। इसके बाद उन्हें राज्यसभा भेजा गया और राष्ट्रीय संगठन महासचिव की जिम्मेदारी भी सौंपी गई। उस दौर में जब केजरीवाल के साथ मनीष सिसोदिया और संजय सिंह भी कानूनी मामलों में व्यस्त थे, पार्टी के राजनीतिक और संगठनात्मक संचालन की जिम्मेदारी काफी हद तक पाठक के पास थी।

हालांकि, 2025 के दिल्ली चुनावों के बाद पार्टी के भीतर समीकरण बदलने लगे। पाठक की रणनीतियों पर सवाल उठे और उन्हें कई महत्वपूर्ण फैसलों से अलग कर दिया गया। पार्टी के भीतर उन पर ‘ओवरप्रॉमिस और अंडरडिलीवर’ जैसे आरोप लगाए गए, जिससे उनकी पकड़ कमजोर होती गई।

दौरान राघव चड्ढा के साथ भी पार्टी का टकराव खुलकर सामने आया। 2 अप्रैल 2026 को AAP ने राज्यसभा में चड्ढा को उपनेता पद से हटाकर अशोक कुमार मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंप दी। इस फैसले के बाद पार्टी के भीतर असंतोष और बढ़ गया।

शुक्रवार (24 अप्रैल) को राज्यसभा नेताओं की नाराजगी ने बड़ा मोड़ लिया, राघव चड्ढा के साथ AAP से इस्तीफा देकरसंदीप पाठक ने भी भाजपा का दामन थाम लिया। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी को कुछ नेताओं के जाने का अंदेशा था, लेकिन यह स्पष्ट नहीं था कि रणनीतिक बैठकों में शामिल कुछ नेता खुद भी पाला बदलने की तैयारी में थे।

इस घटनाक्रम के दौरान कई अन्य कारक भी सामने आए। स्वाति मालीवाल का पार्टी नेतृत्व से टकराव, कुछ नेताओं के खिलाफ जांच एजेंसियों की कार्रवाई और अन्य वरिष्ठ नेताओं से संपर्क न हो पाना, इन सभी ने स्थिति को और जटिल बना दिया।

AAP अब इस पूरे मामले को लेकर राज्यसभा में कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी में है। पार्टी के मुख्य सचेतक एनडी गुप्ता दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की मांग करने की प्रक्रिया में हैं। हालांकि, पार्टी के भीतर यह भी माना जा रहा है कि कानूनी कदम राजनीतिक नुकसान की पूरी भरपाई नहीं कर पाएंगे।

संदीप पाठक का BJP में जाना केवल एक दल-बदल नहीं, बल्कि AAP की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं और संगठनात्मक ढांचे पर सीधा प्रभाव माना जा रहा है। पिछले 30 दिनों में पार्टी ने अपने प्रमुख रणनीतिकार, संगठन महासचिव और राज्यसभा के महत्वपूर्ण पदों पर बैठे नेताओं को खोया है, जिससे आने वाले समय में AAP की राजनीतिक पर गहरा असर पड़ने वाला है।

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