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संजय राउत का बयान: बिहार चुनाव के वक्त फांसी पर लटकाया जाएगा तहव्वुर राणा!

राणा के प्रत्यर्पण को लेकर राजनीति तेज़, भाजपा सांसद बोले- यह भारत की कूटनीतिक जीत

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शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने 26/11 मुंबई आतंकी हमले के आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा को लेकर गुरुवार को एक ऐसा बयान दिया, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। राउत ने दावा किया कि केंद्र सरकार राणा को बिहार विधानसभा चुनावों के दौरान फांसी देगी ताकि राजनीतिक लाभ लिया जा सके।

“राणा को तुरंत फांसी दी जाए, लेकिन चुनाव के वक्त होगा तमाशा”

राउत ने कहा, “राणा को भारत लाने के लिए 16 साल लंबी लड़ाई लड़ी गई, जिसकी शुरुआत कांग्रेस सरकार के दौरान हुई थी। इसलिए इसका श्रेय किसी को नहीं लेना चाहिए। सरकार राणा को फांसी पर लटकाएगी, लेकिन यह सब बिहार चुनाव के दौरान होगा।”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि तहव्वुर राणा कोई पहला प्रत्यर्पित आतंकवादी नहीं है। “अबू सलेम जैसे नाम पहले भी प्रत्यर्पित किए जा चुके हैं। इसमें कोई नई बात नहीं है।”

एनआईए का बयान: वर्षों की मेहनत का नतीजा है राणा का प्रत्यर्पण

राणा, जो पाकिस्तानी मूल का कनाडाई नागरिक है, को भारत विशेष विमान से लाया गया। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि राणा को भारत लाने में अमेरिका के न्याय विभाग (यूएसडीओजे), यूएस स्काई मार्शल्स और भारतीय एजेंसियों ने मिलकर कई सालों की मेहनत की। भारत के विदेश और गृह मंत्रालयों ने इस प्रत्यर्पण में अमेरिका के साथ समन्वय किया।

एनआईए ने कहा कि तहव्वुर राणा, जो 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के कथित मास्टरमाइंडों में से एक है, को अब भारतीय न्याय व्यवस्था के सामने लाया गया है।

बीजेपी सांसद अशोक चव्हाण का पलटवार: यह राजनीतिक मुद्दा नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल है

राउत के बयान पर पलटवार करते हुए बीजेपी सांसद अशोक चव्हाण ने कहा, “राणा का प्रत्यर्पण भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और कानूनी जीत है। यह हमला पाकिस्तान प्रायोजित था और इसमें 166 मासूम लोगों की जान गई थी। राणा से पूछताछ से कई नए खुलासे हो सकते हैं।”

चव्हाण ने यह भी कहा कि अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने प्रत्यर्पण की अनुमति दी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हुई। उन्होंने कहा कि भारत इससे पहले अबू सलेम, छोटा राजन और रवि पुजारी जैसे कुख्यात अपराधियों को भी वापस ला चुका है।

कुलभूषण जाधव पर भी बोले राउत

संजय राउत ने तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण के बहाने कुलभूषण जाधव का मुद्दा भी उठाया और कहा कि सरकार को उन्हें भी पाकिस्तान से वापस लाना चाहिए। “अगर सरकार वाकई में गंभीर है, तो जाधव को भी सुरक्षित भारत वापस लाया जाए,” उन्होंने कहा।

क्या राणा की फांसी चुनावी टाइमिंग पर टिकी है?

राउत के बयान से विपक्ष ने संकेत दिया है कि सरकार राणा को लेकर ‘राजनीतिक स्क्रिप्ट’ तैयार कर रही है, ताकि इसका फायदा चुनावों में उठाया जा सके। हालांकि, बीजेपी ने इसे पूरी तरह नकारते हुए कहा है कि यह एक राष्ट्रीय सुरक्षा और न्याय का मामला है, न कि चुनावी हथकंडा।

बता दें की तहव्वुर राणा पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई में बतौर चिकित्सक काम कर चूका है, पाकिस्तानी आर्मी में नौकरी के दरम्यान उसे लश्कर-ए-तोयबा में भेजा गया था, जहां उसने डेविड हेडली के जरिए भारत में 26/11 का हमला प्लान किया था। प्रत्यर्पण के बाद सुरक्षा एजेंसियां तहव्वुर राणा से जानकारी जुटाने में लगी है। भारत के लिए राणा की फांसी से भी उसका जिंदा रहना अभी अधिक फायदेमंद है। वहीं संजय राऊत राणा के फांसी की मांग कर सुरक्षा एजेंसियों और सरकार पर गैरजरूरी प्रेशर बना रहें है।

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