चीन के तियानजिन में संपन्न हुए शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन का समापन हो गया। सम्मेलन में जारी घोषणा पत्र में पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गई और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता पर जोर दिया गया। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उद्घाटन भाषण में अमेरिका के आधिपत्यवाद को लेकर तीखा संदेश दिया, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद और संप्रभुता के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया।
सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की द्विपक्षीय बैठक चर्चा का केंद्र रही। पुतिन ने कहा कि भारत-रूस संबंध “विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” के 15 वर्ष पूरे कर चुके हैं और दोनों देशों के बीच गहरे व बहुआयामी संबंध हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत और रूस हर परिस्थिति में साथ खड़े रहे हैं और यह साझेदारी वैश्विक शांति एवं स्थिरता के लिए भी अहम है। यूक्रेन संकट पर दोनों नेताओं ने बातचीत की और शांति बहाली के प्रयासों का स्वागत किया।
घोषणा पत्र में “एक पृथ्वी, एक परिवार और एक भविष्य” की भावना का उल्लेख करते हुए विज्ञान-तकनीक, नवाचार, सांस्कृतिक और मानवीय आदान-प्रदान में सहयोग बढ़ाने का संकल्प दोहराया गया। साथ ही आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ संयुक्त संघर्ष पर जोर दिया गया तथा आतंकवाद के समर्थन में दोहरे मापदंडों को अस्वीकार्य बताया गया।
पुतिन ने अमेरिका के साथ हालिया अलास्का वार्ता का जिक्र करते हुए कहा कि यूक्रेन संकट पश्चिम समर्थित तख्तापलट का परिणाम है। उन्होंने भारत और चीन के प्रयासों को सराहा, जो शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सहायक रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत चार दशकों से आतंकवाद का सामना कर रहा है और पहलगाम हमला पूरी मानवता के खिलाफ चुनौती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद का कोई भी रूप स्वीकार्य नहीं और इसके खिलाफ सामूहिक और ठोस कदम उठाना सभी देशों का साझा दायित्व है।
यह भी पढ़ें-



