तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानी AIADMK के भीतर अंदरूनी कलह खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी के कई विधायक और पूर्व मंत्री अब खुलकर पार्टी प्रमुख एडप्पादी के पलानीस्वामी (EPS) के नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं और उनसे पद छोड़ने की मांग कर रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, वरिष्ठ नेता सी.वी. शनमुगम के करीबी माने जाने वाले कई विधायक और पूर्व मंत्री EPS से नाराज हैं। उनका कहना है कि लगातार चार चुनावी हार के बाद पार्टी को नए नेतृत्व की जरूरत है। हालांकि, पार्टी सूत्रों का दावा है कि बढ़ते दबाव के बावजूद EPS फिलहाल इस्तीफा देने के मूड में नहीं हैं।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में AIADMK को बड़ी निराशा हाथ लगी। पार्टी 234 सीटों में से केवल 47 सीटें जीत सकी, जिसके बाद संगठन के भीतर असंतोष तेजी से बढ़ गया। नेताओं का मानना है कि पार्टी की राजनीतिक रणनीति और नेतृत्व की शैली ने कार्यकर्ताओं का मनोबल कमजोर कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार, EPS खेमे और सीवी शन्मुगम समर्थक नेताओं के बीच खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों ने संभावित टूट की आशंकाओं को भी हवा दे दी है।
राजनीतिक गलियारों में पिछले कुछ दिनों से यह चर्चा भी तेज थी कि शनमुगम गुट जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्त्री कज़गम (TVK) के साथ हाथ मिला सकता है। विधानसभा चुनाव में TVK ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटें जीतीं, हालांकि वह बहुमत से 10 सीट पीछे रह गई थी।
इसके बाद TVK ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), विदुथलाई चिरुथैगल काची और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के साथ बातचीत कर समर्थन जुटाया और बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया। इसके बाद विजय ने रविवार (10 मई)को एक भव्य समारोह में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
इसी बीच, जब TVK सरकार बनाने के लिए समर्थन जुटाने में लगी हुई थी, तब सीवी शनमुगम समेत करीब 30 AIADMK विधायक पिछले सप्ताह पुडुचेरी के एक रिसॉर्ट में डेरा डाले हुए थे। इससे पार्टी के भीतर बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की अटकलें और तेज हो गई थीं। बाद में EPS खुद रिसॉर्ट पहुंचे और विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश की।
सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और AIADMK के बीच बैकचैनल बातचीत की खबरें भी सामने आई थीं। बताया जा रहा है कि इस संभावित संपर्क से सीवी शनमुगम नाराज हो गए थे, जिसके बाद उन्होंने TVK समर्थित सरकार के करीब जाने का मन बनाया।
तमिलनाडु की राजनीति में तेजी से बदलते समीकरणों के बीच अब सबकी नजर AIADMK के अगले कदम पर टिकी है। अगर पार्टी के भीतर मतभेद और बढ़ते हैं, तो आने वाले दिनों में तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है।
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