केरल विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर खींचतान तेज होती दिख रही है। तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर और पार्टी हाईकमान के बीच बढ़ती दूरी के संकेत अब खुले तौर पर सामने आने लगे हैं। जानकारी के अनुसार, कांग्रेस आलाकमान की ओर से 23 जनवरी को केरल विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर बुलाई गई दिल्ली की अहम बैठक में शशि थरूर शामिल नहीं होंगे। यह फैसला उन्होंने कोच्चि में आयोजित कांग्रेस की महापंचायत के दौरान कथित अपमान के बाद लिया है, हालांकि इस बारे में उन्होंने सार्वजनिक रूप से कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि शशि थरूर इस समय पार्टी के राज्य और केंद्रीय दोनों स्तरों के नेतृत्व से नाराज हैं। उनके करीबी नेताओं के अनुसार, पार्टी संगठन उनके योगदान और वरिष्ठता को लगातार नजरअंदाज कर रहा है, जिससे असंतोष और गहराया है।
यह पूरा विवाद कुछ दिन पहले कोच्चि में आयोजित कांग्रेस की महापंचायत से जुड़ा है, जिसमें राहुल गांधी भी मौजूद थे। कार्यक्रम से पहले तय प्रोटोकॉल के अनुसार, शशि थरूर के भाषण के बाद केवल राहुल गांधी का संबोधन होना था। वक्ताओं का क्रम भी इसी आधार पर निर्धारित किया गया था। हालांकि, कार्यक्रम के दौरान इस क्रम में बदलाव कर दिया गया और थरूर के भाषण के बाद कई अन्य नेताओं को बोलने का मौका दिया गया। राहुल गांधी ने अंत में भाषण तो दिया, लेकिन मंच पर मौजूद शशि थरूर का नाम तक नहीं लिया। इसे कांग्रेस सांसद के समर्थक अपमानजनक मान रहे हैं। यह राहुल गांधी की चूक थी या कोई राजनीतिक संकेत इस पर पार्टी के भीतर अलग-अलग व्याख्याएं की जा रही हैं, लेकिन इस घटनाक्रम ने थरूर की नाराजगी को और बढ़ा दिया।
सूत्रों के अनुसार, महापंचायत में बैठने की व्यवस्था में भी शशि थरूर की वरिष्ठता को नजरअंदाज किया गया। इसी को आधार बनाते हुए उन्होंने केरल चुनाव की रणनीति पर चर्चा के लिए दिल्ली में बुलाई गई बैठक से दूरी बनाए रखने का फैसला किया है। इस दौरान वह कालीकत में आयोजित केरल लिटरेचर फेस्टिवल में हिस्सा लेंगे।
पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा करने के कारण शशि थरूर को कांग्रेस नेतृत्व असहज नजर से देख रहा है। पहलगाम हमले के बाद जब थरूर ने खुफिया चूक के आरोपों पर मोदी सरकार को क्लीन चिट दी थी, तभी से मतभेद खुलकर सामने आने लगे थे। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद विदेश भेजे गए संसदीय प्रतिनिधिमंडल में उनके चयन पर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए थे।
इसके अलावा, विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार की सराहना करने को लेकर पार्टी के उदित राज और जयराम रमेश जैसे नेताओं ने भी थरूर पर तीखे हमले किए। हाल ही में गौतम गंभीर के साथ साझा की गई एक तस्वीर और उससे जुड़े उनके बयान ने भी विवाद को हवा दी।
सूत्रों का दावा है कि केरल कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने शशि थरूर को विधानसभा चुनाव से अलग रखने के लिए हाईकमान को मनाने में भूमिका निभाई है। इन संकेतों के बाद थरूर ने खुद पार्टी की बैठकों से दूरी बनानी शुरू कर दी है। बता दें की, केरल चुनाव से पहले यह घटनाक्रम कांग्रेस के लिए एक नई चुनौती के रूप में उभर रहा है।
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