शशि थरूर लगातार तीसरी बार राहुल गांधी की बैठक से गैरहाज़िर

कांग्रेस में आतंरिक कलह उजागर

शशि थरूर लगातार तीसरी बार राहुल गांधी की बैठक से गैरहाज़िर

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कांग्रेस सांसद शशि थरूर की लगातार तीसरी बार महत्वपूर्ण पार्टी बैठकों से गैरहाज़िरी ने संगठन के भीतर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुक्रवार (12 दिसंबर) को राहुल गांधी ने की अध्यक्षता में लोकसभा सांसदों की बैठक में भी थरूर अनुपस्थित रहे। यह अनुपस्थिति ऐसे समय में दर्ज हुई है जब पार्टी संसद सत्र के दौरान एकजुटता बनाए रखने की कोशिश कर रही है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, थरूर ने नेतृत्व को पहले ही अपनी अनुपलब्धता की सूचना दे दी थी, लेकिन कांग्रेस के मुख्य वीप  ने कहा कि उन्हें उनकी गैरहाज़िरी के कारणों की जानकारी नहीं है। थरूर की यह लगातार अनुपस्थिति इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि हाल के महीनों में उनके कुछ बयान भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अनुकूल माने गए है, जिससे पार्टी में असहजता बढ़ी है।

थरूर के साथ चंडीगढ़ से कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी भी शुक्रवार(12 दिसंबर) की बैठक में मौजूद नहीं थे। थरूर गुरुवार (11 दिसंबर)रात कोलकाता में प्रभा खेतान फ़ाउंडेशन के एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे, जिससे संकेत मिलता है कि वह समय पर दिल्ली नहीं लौट पाए।

यह अनुपस्थिति उन दिनों बाद सामने आई है जब थरूर ने 30 नवंबर को हुई कांग्रेस की रणनीतिक समूह बैठक से गैरहाज़िर रहने को लेकर स्पष्टीकरण दिया था। उन्होंने कहा था, “मैंने इसे छोड़ा नहीं; मैं केरल से आ रहा था और प्लेन में था।”

इससे पहले भी थरूर विशेष मतदाता सूची संशोधन (SIR) पर हुई बैठक में शामिल नहीं हो पाए थे। उनके कार्यालय ने कहा था कि वह अपनी 90 वर्षीय मां के साथ केरला से देर वाली उड़ान में यात्रा कर रहे थे, जिससे वह बैठक के समय दिल्ली नहीं पहुंच सके। कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल भी स्थानीय निकाय चुनावों के कारण उस बैठक में नहीं पहुँच पाए थे।

हालाँकि, कई कांग्रेस नेताओं का मत है कि थरूर की बार-बार अनुपस्थिति पार्टी अनुशासन और प्राथमिकताओं को लेकर गंभीर संकेत देती है। खासकर तब जब पिछले दिनों वे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सम्मान में राष्ट्रपति द्वारा आयोजित राज्य भोज के एकमात्र कांग्रेस प्रतिनिधि के रूप में शामिल हुए थे। इस निमंत्रण ने पार्टी के भीतर नई चर्चाओं को जन्म दिया।

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने तब टिप्पणी की थी, “हर किसी की अंतरात्मा की आवाज़ होती है। जब मेरे लीडर्स को बुलाया नहीं जाता, लेकिन मुझे बुलाया जाता है, तो हमें समझना चाहिए कि यह खेल क्यों खेला जा रहा है, कौन खेल रहा है, और हमें इसका हिस्सा क्यों नहीं बनना चाहिए।” कांग्रेस नेतृत्व ने इस पूरी मुद्दे पर अब तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन शशि थरूर की लगातार अनुपस्थिति ने पार्टी के भीतर असहजता और अटकलें दोनों को तेज कर दिया है।

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