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Saturday, January 31, 2026
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“बालासाहेब ने यही सिखाया है कोई आंग पर आता है तो भीड़ जाना है।”

शिवसेना विधायक संजय गायकवाड़ ने कैंटीन कर्मचारी की पिटाई को बताया 'ठीक'

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मुंबई स्थित विधायकों के सरकारी निवास ‘आकाशवाणी’ की कैंटीन में घटिया खाना मिलने पर कथित रूप से एक कैंटीन संचालक की पिटाई करने वाले शिवसेना विधायक संजय गायकवाड़ ने अब अपनी हरकत का खुलकर बचाव किया है। वायरल वीडियो में गायकवाड़ कैंटीन ऑपरेटर को थप्पड़ और घूंसे मारते दिख रहे हैं, और अब उन्होंने कहा है कि “ज़हर परोसा जाएगा तो पूजा नहीं करेंगे।”

गायकवाड़ ने कहा, “अगर कोई मुझे ज़हर खिलाए तो क्या मैं उसकी पूजा करूं? बाला साहेब ठाकरे ने हमें यह नहीं सिखाया। उन्होंने सिखाया कि अगर कोई अज्ञानी है, तो उस पर कार्रवाई करो। मेरी प्रतिक्रिया बिल्कुल उपयुक्त थी।”

एकनाथ शिंदे की शिवसेना से विधायक संजय गायकवाड़ बुलढाणा से दो बार चुने गए हैं। उन्होंने बताया कि वे पिछले 30 वर्षों से इस कैंटीन में खाना खा रहे हैं और 5.5 साल से यहां रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह लगातार खाना बेहतर करने की अपील करते रहे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। “अंडे 15 दिन पुराने, नॉनवेज 20 दिन पुराना, सब्ज़ियां 2-4 दिन पुरानी। 5,000 से 10,000 लोग यहां खाना खाते हैं और सभी को शिकायत है। पहले भी खाने में छिपकली, चूहे और रस्सी तक पाई गई है।”

घटना मंगलवार (8 जुलाई) रात की बताई जा रही है जब गायकवाड़ ने रात 10 बजे खाना मंगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जैसे ही उन्होंने दाल का पहला निवाला लिया, उन्हें खाने में गड़बड़ी महसूस हुई। “खाने की गंध से साफ लग रहा था कि यह बासी है। मैंने सभी को सूंघने के लिए कहा, और सभी ने माना कि खाना खराब है।”

वायरल वीडियो में गायकवाड़ खुद कहते सुने गए कि “मैंने उसे अपने स्टाइल में सबक सिखाया।” उन्होंने ANI से बातचीत में इस बयान को दोहराया और कहा, “अगर वे अब भी नहीं सुनते हैं तो मेरा खुद का तरीका है समझाने का। सरकार को हर साल हजारों शिकायतें मिलती हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती। किचन में चूहे और गंदगी है… यह गंभीर स्वास्थ्य खतरा है।”

गायकवाड़ ने स्पष्ट किया कि वह इस विषय को महाराष्ट्र विधानसभा सत्र में उठाएंगे और कैंटीन की जांच तथा संचालन में बदलाव की मांग करेंगे। हालांकि, विधायक द्वारा की गई मारपीट पर सोशल मीडिया और विपक्षी नेताओं की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। कई लोगों ने इसे अत्यधिक और कानून से परे आचरण करार दिया है।

सरकार और विधानसभा प्रशासन की ओर से इस मामले पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन यह सवाल जरूर खड़ा हो गया है कि एक जनप्रतिनिधि को अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए हाथ उठाने की अनुमति दी जा सकती है या नहीं।

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