10 जून को पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना ज़िले के महेष्ठला इलाके में भड़की हिंसा के बाद हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। घटना के बाद पुलिस ने इलाके में भारी संख्या में जवान तैनात किए हैं और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू की गई है। अब तक इस मामले में करीब 40 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
हिंसा के दौरान शिव मंदिर में तोड़फोड़, दुकानों पर हमले और पुलिसकर्मियों पर पथराव की घटनाएं सामने आईं। कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। घटना से संबंधित कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं, जिनमें उपद्रवियों द्वारा इलाके में उत्पात मचाते हुए देखा जा सकता है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता विपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने इस हिंसा को लेकर राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार एक खास वोट बैंक के दबाव में कार्रवाई करने से बच रही है। उन्होंने कहा, “यह कानून व्यवस्था की विफलता का उदाहरण है। प्रशासन जानबूझकर शांत है, क्योंकि दोषियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है।”
शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के पुलिस महानिदेशक और डायमंड हार्बर पुलिस ज़िले के एसपी से अनुरोध किया है कि उन्हें और एक विधायक को घटनास्थल पर जाने दिया जाए, ताकि वे पीड़ित दुकानदारों और परिवारों से मिलकर उनका दुख साझा कर सकें।
I have approached the SP of Diamond Harbour Police District and DGP @WBPolice so that today, I along with one MLA can visit Maheshtala under Rabindranagar Police Station to meet and express solidarity with the victims of the Hindu families and the affected Hindu shopkeepers who… pic.twitter.com/qX1YORH1GY
— Suvendu Adhikari (@SuvenduWB) June 12, 2025
स्थानीय लोगों के अनुसार, महेष्ठला के एक शिव मंदिर के परिसर में स्थित तालाब को धीरे-धीरे मिट्टी से भरा जा रहा था, जिससे अतिक्रमण की आशंका थी। मंगलवार को जब मुसलमानों ने मंदिर की ज़मीन पर दुकान लगाने की कोशिश की तो स्थानीय हिंदू समाज के लोगों ने इसका विरोध किया। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में टकराव हुआ, जो हिंसा में बदल गया।
इस दौरान मंदिर पर पथराव हुआ, आसपास की दुकानों को क्षति पहुंचाई गई और मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों पर भी हमला हुआ। भाजपा नेताओं का आरोप है कि मंदिर का तुलसी मंच तक नहीं छोड़ा गया और हिंदू परिवारों को पूरी रात जागकर अपनी सुरक्षा करनी पड़ी।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घटना की जांच जारी है और कई स्थानों पर छापेमारी की जा रही है। “हमने अब तक 40 लोगों को गिरफ्तार किया है और क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है,” एक अधिकारी ने बताया। घटना को लेकर राज्य भाजपा इकाई ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। भाजपा के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से कई वीडियो साझा किए गए, जिनमें दावा किया गया कि पुलिस मौके पर मौजूद होते हुए भी मूकदर्शक बनी रही।
भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि रवींद्रनगर थाना प्रभारी मुकुल मियां ने जानबूझकर कार्रवाई में देरी की, जिससे हालात बिगड़ते चले गए। पार्टी ने उनकी गिरफ्तारी और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की है। इस मामले को लेकर 12 जून को भाजपा विधायकों ने विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव की मांग की, जिसे स्पीकर द्वारा ठुकरा दिया गया। इसके विरोध में भाजपा विधायकों ने सदन से वॉकआउट किया।
"We are in a life-and-death situation. The crowd is huge, we are unable to fight back… They are throwing bricks like madmen."
This is the statement from Kolkata Police after the jihadi rampage in Maheshtala. From senior officers to constables and even female police personnel —… pic.twitter.com/AbysaLQFPA
— BJP West Bengal (@BJP4Bengal) June 11, 2025
Glimpses of Lawlessness, Unruliness, Complete Breakdown of Governance and Administration, Hapless condition of Law and Order Apparatus in Maheshtala – Rabindranagar today.
This is what happens when you feed a rabid dog, it bites you back one day. These Jidasists know that they… pic.twitter.com/mOiQKsavRG
— Suvendu Adhikari (@SuvenduWB) June 11, 2025
बता दें की यह पहली बार नहीं है की पश्चिम बंगाल सरकार जिहादी उन्मादियों के समर्थन में हिंसक घटना पर मूकदर्शक बन हिंदूओं को खतरे में धकेलती रही है। कोलकता उच्च न्यायलय की रिपोर्ट के अनुसार इससे पहले अप्रैल के महीने में मुर्शिदाबाद, मालदा के जिलों में वक्फ संशोधन कानून की आड़ में इस्लामी उत्पातियों के दंगो पर भी पश्चिम बंगाल की पुलिस निष्क्रिय बनी रही और तृणमूल कांग्रेस सरकार के नेता इन हिंसक कार्रवाइयों में शामिल थे।
यह घटना प्रदेश में गिरी हुई, निष्क्रीय कानून व्यवस्था और धार्मिक तुष्टिकरण को लेकर एक बार फिर बहस के केंद्र में आई है, जहां एक ओर पीड़ित समुदाय न्याय की मांग करता है तो उसे नजअंदाज किया जाता है। वहीं हिंसक समुदायों की हरकतों पर राज्य सरकार लगाम लगाने के बजाए मूकदर्शक बन खडी है।
यह भी पढ़ें:
अहमदाबाद विमान हादसा : राष्ट्रपति मुर्मू, पीएम मोदी समेत नेताओं ने जताया शोक!
एयर इंडिया हादसे के बाद अहमदाबाद एयरपोर्ट पर फ्लाइट ऑपरेशन अस्थायी रोक!
भारत की 10 बड़ी विमान दुर्घटनाएं, जिन्होंने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया!



