33 C
Mumbai
Sunday, April 19, 2026
होमक्राईमनामाशिव मंदिर तोड़फोड़ और दुकानों पर हमले के बाद सियासी घमासान!

शिव मंदिर तोड़फोड़ और दुकानों पर हमले के बाद सियासी घमासान!

भाजपा ने 'ममता पुलिस' को घेरा

Google News Follow

Related

10 जून को पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना ज़िले के महेष्ठला इलाके में भड़की हिंसा के बाद हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। घटना के बाद पुलिस ने इलाके में भारी संख्या में जवान तैनात किए हैं और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू की गई है। अब तक इस मामले में करीब 40 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

हिंसा के दौरान शिव मंदिर में तोड़फोड़, दुकानों पर हमले और पुलिसकर्मियों पर पथराव की घटनाएं सामने आईं। कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। घटना से संबंधित कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं, जिनमें उपद्रवियों द्वारा इलाके में उत्पात मचाते हुए देखा जा सकता है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता विपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने इस हिंसा को लेकर राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार एक खास वोट बैंक के दबाव में कार्रवाई करने से बच रही है। उन्होंने कहा, “यह कानून व्यवस्था की विफलता का उदाहरण है। प्रशासन जानबूझकर शांत है, क्योंकि दोषियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है।”

शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के पुलिस महानिदेशक और डायमंड हार्बर पुलिस ज़िले के एसपी से अनुरोध किया है कि उन्हें और एक विधायक को घटनास्थल पर जाने दिया जाए, ताकि वे पीड़ित दुकानदारों और परिवारों से मिलकर उनका दुख साझा कर सकें।

स्थानीय लोगों के अनुसार, महेष्ठला के एक शिव मंदिर के परिसर में स्थित तालाब को धीरे-धीरे मिट्टी से भरा जा रहा था, जिससे अतिक्रमण की आशंका थी। मंगलवार को जब मुसलमानों ने मंदिर की ज़मीन पर दुकान लगाने की कोशिश की तो स्थानीय हिंदू समाज के लोगों ने इसका विरोध किया। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में टकराव हुआ, जो हिंसा में बदल गया।

इस दौरान मंदिर पर पथराव हुआ, आसपास की दुकानों को क्षति पहुंचाई गई और मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों पर भी हमला हुआ। भाजपा नेताओं का आरोप है कि मंदिर का तुलसी मंच तक नहीं छोड़ा गया और हिंदू परिवारों को पूरी रात जागकर अपनी सुरक्षा करनी पड़ी।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घटना की जांच जारी है और कई स्थानों पर छापेमारी की जा रही है। “हमने अब तक 40 लोगों को गिरफ्तार किया है और क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है,” एक अधिकारी ने बताया। घटना को लेकर राज्य भाजपा इकाई ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। भाजपा के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से कई वीडियो साझा किए गए, जिनमें दावा किया गया कि पुलिस मौके पर मौजूद होते हुए भी मूकदर्शक बनी रही।

भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि रवींद्रनगर थाना प्रभारी मुकुल मियां ने जानबूझकर कार्रवाई में देरी की, जिससे हालात बिगड़ते चले गए। पार्टी ने उनकी गिरफ्तारी और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की है। इस मामले को लेकर 12 जून को भाजपा विधायकों ने विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव की मांग की, जिसे स्पीकर द्वारा ठुकरा दिया गया। इसके विरोध में भाजपा विधायकों ने सदन से वॉकआउट किया।

बता दें की यह पहली बार नहीं है की पश्चिम बंगाल सरकार जिहादी उन्मादियों के समर्थन में हिंसक घटना पर मूकदर्शक बन हिंदूओं को खतरे में धकेलती रही है। कोलकता उच्च न्यायलय की रिपोर्ट के अनुसार इससे पहले अप्रैल के महीने में मुर्शिदाबाद, मालदा के जिलों में वक्फ संशोधन कानून की आड़ में इस्लामी उत्पातियों के दंगो पर भी पश्चिम बंगाल की पुलिस निष्क्रिय बनी रही और तृणमूल कांग्रेस सरकार के नेता इन हिंसक कार्रवाइयों में शामिल थे।

यह घटना प्रदेश में गिरी हुई, निष्क्रीय कानून व्यवस्था और धार्मिक तुष्टिकरण को लेकर एक बार फिर बहस के केंद्र में आई है, जहां एक ओर पीड़ित समुदाय न्याय की मांग करता है तो उसे नजअंदाज किया जाता है। वहीं हिंसक समुदायों की हरकतों पर राज्य सरकार लगाम लगाने के बजाए मूकदर्शक बन खडी है।

यह भी पढ़ें:

अहमदाबाद विमान हादसा : राष्ट्रपति मुर्मू, पीएम मोदी समेत नेताओं ने जताया शोक!

एयर इंडिया हादसे के बाद अहमदाबाद एयरपोर्ट पर फ्लाइट ऑपरेशन अस्थायी रोक!

भारत की 10 बड़ी विमान दुर्घटनाएं, जिन्होंने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया!

National Stock Exchange

लेखक से अधिक

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

The reCAPTCHA verification period has expired. Please reload the page.

Star Housing Finance Limited

हमें फॉलो करें

151,174फैंसलाइक करें
526फॉलोवरफॉलो करें
303,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

अन्य लेटेस्ट खबरें