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दिल्ली हाईकोर्ट को मिले 6 नए न्यायाधीश, मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय ने दिलाई शपथ!

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दिल्ली हाईकोर्ट में सोमवार (21 जुलाई )को एक अहम बदलाव देखने को मिला जब छह नए न्यायाधीशों ने शपथ ली। इन सभी न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद विभिन्न उच्च न्यायालयों से स्थानांतरित किया गया है। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय ने शपथ ग्रहण समारोह में सभी नव-नियुक्त न्यायाधीशों को पद की शपथ दिलाई। शपथ लेने वाले न्यायाधीशों में न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव, न्यायमूर्ति नितिन वासुदेव साम्ब्रे, न्यायमूर्ति विवेक चौधरी, न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल, न्यायमूर्ति अरुण मोंगा और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला शामिल हैं।

इन नियुक्तियों के साथ दिल्ली हाईकोर्ट में कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 40 हो गई है, हालांकि यहां स्वीकृत कुल पदों की संख्या 60 है। यह कदम न्यायिक प्रक्रिया को तेज़ और अधिक प्रभावशाली बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है, क्योंकि वे पहले भी दिल्ली हाईकोर्ट में सेवा दे चुके हैं। मई 2024 में कर्नाटक हाईकोर्ट स्थानांतरित होने के बाद अब वे फिर से दिल्ली लौटे हैं। उन्हें अप्रैल 2013 में दिल्ली हाईकोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश और मार्च 2015 में स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया था।

न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल, जो पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से आए हैं, ने 1988 में चंडीगढ़ में वकालत शुरू की थी और 2014 में सीनियर एडवोकेट बनाए गए थे। 2017 में उन्हें उच्च न्यायालय में अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया।न्यायमूर्ति अरुण मोंगा, जिन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की, 1991 से वकालत कर रहे हैं। वे 2018 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायाधीश बने थे और नवंबर 2023 में उन्हें राजस्थान हाईकोर्ट स्थानांतरित किया गया था।

न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला, जो इलाहाबाद हाईकोर्ट से आए हैं, ने लखनऊ यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री ली और सुप्रीम कोर्ट समेत विभिन्न अदालतों में वकालत की है। वे 2022 में अतिरिक्त और 2024 में स्थायी न्यायाधीश बने।न्यायमूर्ति विवेक चौधरी भी इलाहाबाद हाईकोर्ट से स्थानांतरित हुए हैं। मेरठ यूनिवर्सिटी से 1988 में कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने वकालत शुरू की और 2017 में अतिरिक्त तथा 2018 में स्थायी न्यायाधीश नियुक्त हुए।

न्यायमूर्ति नितिन वासुदेव साम्ब्रे, जो बॉम्बे हाईकोर्ट से दिल्ली आए हैं, ने 1992 में नागपुर यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री ली और 2014 में बॉम्बे हाईकोर्ट में न्यायाधीश नियुक्त हुए।

इन नियुक्तियों से दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायिक क्षमता को मजबूती मिलेगी और लंबित मामलों के निपटारे में गति आने की संभावना है। न्यायिक क्षेत्र में यह एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, जो आम जन के लिए त्वरित न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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