ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के ताज़ा हमलों के बीच इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के कमांडर सरदार हुसैन नेजात ने पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि पाकिस्तान ने अपने हवाई क्षेत्र का उपयोग अमेरिका और इज़राइल को ईरान पर हमले के लिए करने दिया।
नेजात ने 2 मार्च को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, “हमारी सटीक जांच से पता चलता है कि यूनाइटेड स्टेट्स और ज़ायोनी शासन ने ईरान पर हमले में पाकिस्तान के एयरस्पेस का इस्तेमाल किया। पाकिस्तान को जल्द ही इस कार्रवाई की कीमत चुकानी पड़ेगी और खाड़ी (देशों) की तरह, वह भी हमारी मिसाइलों से सुरक्षित नहीं रहेगा।”
उनके इस बयान के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है। गौरतलब है कि हाल ही में अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर मिसाइल हमले किए थे, जिसके जवाब में तेहरान ने इज़राइल और मध्य-पूर्व में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया।
यदि ईरानी सरकार आधिकारिक रूप से IRGC कमांडर के आरोपों की पुष्टि करती है, तो ईरान और पाकिस्तान के संबंधों में गंभीर गिरावट आ सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा हालात में दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता है।
Our precise investigations indicate that the United States and the Zionist regime used Pakistan’s airspace in their attack on Iran.
Pakistan will soon pay the price for this action and, like the Gulf (states), will not remain safe from our missiles.#Iran #IranWar pic.twitter.com/PhYbTUJUnp— سردار حسین نجات (@HosseinNejat1) March 2, 2026
पाकिस्तान में पहले से ही हालात संवेदनशील बने हुए हैं। ईरान के इस्लमी लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद पाकिस्तान के शिया समुदाय में व्यापक रोष देखा गया है। 1 मार्च को अमेरिका-इज़राइल की बमबारी के विरोध में पाकिस्तान के कई शहरों में प्रदर्शन हुए, जो कई स्थानों पर हिंसक हो गए।
कराची बंदरगाह शहर में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बाहर प्रदर्शन के दौरान स्थिति तब बिगड़ गई जब भीड़ ने बाहरी दीवार तोड़ने की कोशिश की। सुरक्षा बलों की गोलीबारी में कम से कम 10 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई। देशभर में हुई झड़पों में कुल मृतकों की संख्या 23 बताई जा रही है।
पाकिस्तान सरकार या सेना की ओर से अब तक आईआरजीसी के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ईरान ने इन आरोपों के आधार पर जवाबी कार्रवाई की, तो क्षेत्र में एक नया मोर्चा खुल सकता है।
मौजूदा परिदृश्य में पाकिस्तान पहले ही अफगानिस्तान के साथ सीमा तनाव और आंतरिक अशांति से जूझ रहा है। ऐसे में ईरान के साथ संभावित सैन्य टकराव की आशंका क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है। क्षेत्र में तेजी से बदलते घटनाक्रमों के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब तेहरान और इस्लामाबाद की आधिकारिक प्रतिक्रियाओं पर टिकी हैं।
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